राकेश जाधव: एक स्कूल ऐसा भी….!जहाँ पढ़ाई कम और पढ़ना ज़्यादा है।जहाँ अध्ययन कम और रटना ज़्यादा हैं।जहाँ सभ्याचार की… READ MORE
डेज़ी कूजुर: जितनी लंबी और चौड़ी रोड, उतनी बड़ी ट्रक, उतने बड़े लोग, और उतनी बड़ी लालच। जितनी लंबी और… READ MORE
गोपाल पटेल: मैं वृक्ष हूँ, इस माटी का x2जो मुझे सींच कर रखती है।मैं वृक्ष हूँ इस माटी का जो मुझे… READ MORE
इस गीत के रचयिता बिहार के गया ज़िले में स्थित सहोदय शिक्षण केंद्र में पढ़ने वाले, 12 वर्षीय, संतोष कुमार… READ MORE
छोटू लाल नागवंशी: वो करता रहा भौं-भौं, तेरे सोने पर जहां लगा था बिस्तर, दूसरे कोने पर हां, उसका प्रकृति… READ MORE
जगदीश चौहान: भगतसिंह की किताब, मैं नास्तिक क्यों हूं?, अछूत की समस्या, और बाबासाहेब डॉ आंबेडकर की किताब जाति का… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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