ओमप्रकाश वाल्मीकि: चूल्हा मिट्टी कामिट्टी तालाब कीतालाब ठाकुर का। भूख रोटी कीरोटी बाजरे कीबाजरा खेत काखेत ठाकुर का। बैल ठाकुर… READ MORE
शिवांशु मिश्रा: पिछले दिनों अपनी लाइब्रेरी में किताबें खोजने के दौरान एक शीर्षक देखकर अचानक रुक गया और किताब को… READ MORE
अरबिंद भगत: हम अच्छे भले जी रहे थेइस दुनिया से दूर,जिसे सभ्य कहा जाता है आज। हम जी रहे अपनी… READ MORE
यह कविता पावरी भाषा में लिखी गयी है। यह भाषा पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे लगे महाराष्ट्र के भील, पावरा… READ MORE
मोहन सिंह: हमे लूट रही मिल के, जा सरकार… x 2 जाग-जाग नौजवान तू जाग,अपने हक़-अधिकार को पहचान..जाग-जाग नौजवान तू… READ MORE
विश्वजीत नास्तिक:अररिया, बिहार | कक्षा 12वी तेरी यादों का मौसम,बेमौसम बरसात की तरह है…,जब भी आती है,मुझे भीगा जाती है…।… READ MORE
मुस्कान पटेल: बरसात का आगाज़किसान की आवाज़ तिल अभी बस मुस्कुराई थी,उड़द, लहलहाई ही थीमूंग में महक आई ही थी,कि… READ MORE
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह: हम करोड़ों दिए भी जला देंगे परराम जंगल से वापस आएंगे नहीं। हमने लाखोंदिखावे-छलावे कियेमन के दीपक… READ MORE
इंदु सिंह: कलम आधी नहीं हो सकतीकलम पीछे नहीं लौट सकतीजितनी बंदूके हैं दुनिया मेंपेंसिल कलम उनसे ज़्यादातादाद में, एक… READ MORE
सोनामुनी मुर्मू: ପହିଲି ପରଶ ବର୍ଷା ରାଣୀର,ମନରେ ଜାଗି ଉଠିଲା ତୁପ୍ତି ଆନନ୍ଦର। ବର୍ଷା ର ସ୍ପର୍ଶ ପାଇ ଖୋଲିଲା ଆଖିପତା,ହସି ଉଠିଲା କେତେ ଯେ ତରୁଲତା… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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