कोर्दूला कुजूर: आषाढ़ महीना आते ही पानी बरसने पर किसान अपने खेतों को तैयार करने लगता है और बिचड़ा लगा… READ MORE
जिनित सामाद: “देश की माटी में रचा-बसा पसीना,गांवों, शहरों की धूल में जीना,खदानों की गहराई में खोए कई नाम,फिर भी… READ MORE
राकेश जाधव ‘आरटीजेडी’: अब बहुत हो गया…सब्र जवाब दे रहा है,अब तो दिल भी बेचैन हो उठा है। कोशिश हमने… READ MORE
राकेश जाधव (आरटीजेडी): जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!कुछ यहाँ लड़ते हैं,कुछ समझौते करते हैं।कुछ खुद के लिए लड़ते… READ MORE
संजीव कुमार: अगर रुकूँ तो जाऊं कहाँ, अगर रुकों तो जाओं कहाँमेरे यूँ रुक जाने से, यूँ थक बैठ जाने… READ MORE
भरत भट्ट: दूर कहीं एक दीपक जल रहा था,मेरे जेहन में तुम्हारा ख्याल पल रहा था,तुम्हें सोचते सोचते रात इतनी… READ MORE
नंदिनी शर्मा: नौकरी जीवन का एक हिस्सा है,पर पूरा जीवन नहीं।।यह बात जानते हुए भीहम काम के बीच कहीं इसे… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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