राकेश जाधव (आरटीजेडी): जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!कुछ यहाँ लड़ते हैं,कुछ समझौते करते हैं।कुछ खुद के लिए लड़ते… READ MORE
संजीव कुमार: अगर रुकूँ तो जाऊं कहाँ, अगर रुकों तो जाओं कहाँमेरे यूँ रुक जाने से, यूँ थक बैठ जाने… READ MORE
भरत भट्ट: दूर कहीं एक दीपक जल रहा था,मेरे जेहन में तुम्हारा ख्याल पल रहा था,तुम्हें सोचते सोचते रात इतनी… READ MORE
नंदिनी शर्मा: नौकरी जीवन का एक हिस्सा है,पर पूरा जीवन नहीं।।यह बात जानते हुए भीहम काम के बीच कहीं इसे… READ MORE
भरत भट्ट: वो गुज़र रही है धीरे से मेरी लाश के ऊपर सेचार क़दम चढ़े है मेरे, कफ़न के ऊपर… READ MORE
ज्ञानेन्द्र अवस्थी: निक हनौएर कोई वामपंथी प्रोफेसर नहीं हैं।वह किसी एनजीओ से पेट नहीं भरते।वह अमेरिका के शीर्ष 0.01% अमीरों… READ MORE
नंदिनी: आज का युवा दो जंग लड़ता है—एक किताबों से, एक हालातों से।एक CV के पन्नों में खुद को समेटता… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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