उर्मिला: जनता सूचना केंद्र की लाइब्रेरी हम ‘लाइब्रेरी से दोस्ती’ कोर्स से पहले चलाते थे। यह चार गाँवों, घूघरा, मालमाथा,… READ MORE
ज़ैनब फातिमा: कुछ इमारतें सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं होतीं, वे हमारी यादों और हमारी पहचान की नींव… READ MORE
राधा परिहार: अनुभव: स्कूल खत्म होने के बाद जब मेरे साथी अपने आगे की पढ़ाई और सपनों को पूरा करने… READ MORE
विलास भोंगाडे: मेरी प्राथमिक शिक्षा जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा में हुई। सातवी कक्षा तक थी। याने सात वर्ग खोलियाँ थीं।… READ MORE
मोहित लोधियाल: मेरे लिए स्कूल केवल वह जगह नहीं है जहाँ किताबों के अध्याय पूरे किए जाते हैं और परीक्षाएँ… READ MORE
ब्रजेश कुमार निराला: किसी भी देश या समाज का विकास तभी संभव है, जब वहाँ के लोग, खासकर युवा, एक… READ MORE
अंजू मल्होत्रा: पति-पत्नी का रिश्ता केवल सात फेरों का बंधन नहीं होता, यह दो लोगों के धीरे-धीरे एक-दूसरे के साथ… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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