गुफरान: भारतीय लोकतंत्र की चर्चा जब भी होती है, एक शब्द बार-बार सामने आता है। संवैधानिक नैतिकता। यह शब्द सुनने… READ MORE
संजीव कुमार: सहरिया जनजाति, जो PVTG की सूची में शामिल है, यह देश की अत्यंत पिछड़ी जनजातियों में से एक… READ MORE
रिपोर्ट: अशोक तांगडे, संकलन – महीपाल सिंह: यह लेख बीड ज़िले में काम कर रहे अशोक तांगडे भाऊ के साथ… READ MORE
लाएबा सिद्दीकी: “कोई भी राष्ट्र केवल ज़मीन से नहीं बनता, बल्कि अपने लोगों की भावना और आत्मा से बनता है।”… READ MORE
जितेन्द्र तबियाड, मन्ना लाल नेनोमा: वीर बाला कालीबाई भील कलासुआ डूंगरपुर ज़िले के रास्तापाल गाँव की एक भील बालिका थी।… READ MORE
विलसन एक्का: वर्तमान समय में आदिवासी सवाल और उसकी चुनौतियाँ – वर्तमान समय को केवल एक ऐतिहासिक कालखंड मान लेना… READ MORE
जिनित सामाद: ओडिशा के संबलपुर ज़िले का कुचिंडा उपखंड कोई साधारण इलाक़ा नहीं है। यह संविधान की पाँचवीं अनुसूची के… READ MORE
ज़ेबा वसी: अक्टूबर की हल्की ठंडी सुबह थी। जब मैंने दिल्ली से अयोध्या के लिए ट्रेन पकड़ी, तो मन में… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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