गुफरान : सिनेमा और साहित्य जब एक-दूसरे से संवाद करते हैं, तो वे केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं रहते, बल्कि… READ MORE
सिम्मी : अगर सिनेमा की बात की जाए तो यह सिर्फ मनोरंजन का एक साधन है। जिसको देखने भर से… READ MORE
विकास कुमार: “मुझे महसूस होता है कि मेरे हाथों में खून हैं।” यह शब्द परमाणु बम के पिता कहे जाने… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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