रिपोर्ट: अशोक तांगडे, संकलन – महीपाल सिंह: यह लेख बीड ज़िले में काम कर रहे अशोक तांगडे भाऊ के साथ… READ MORE
जीनित सामाद: भारत का ग्रामीण समाज लंबे समय से आजीविका, पलायन और असुरक्षा के त्रिकोण में फंसा रहा है। ऐसे… READ MORE
ज्ञानेन्द्र अवस्थी: निक हनौएर कोई वामपंथी प्रोफेसर नहीं हैं।वह किसी एनजीओ से पेट नहीं भरते।वह अमेरिका के शीर्ष 0.01% अमीरों… READ MORE
गुफरान: भोजन वो चीज़ जिसे गरीब आदमी खाता है, नेता खाते हैं (पर मतलब कुछ और होता है), और संयुक्त… READ MORE
डॉ. रिंकी कुमारी: भारत के सबसे प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रदेशों में शामिल बिहार, आज विस्थापन और बेरोज़गारी… READ MORE
सिम्मी, जागृति और शकुन्तला : ‘कर्ज़’ ये शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में ऐसी छवि बन जाती है जिससे हर… READ MORE
राजकुमार सिन्हा: हाल में हुए कृषि अर्थशास्त्रियों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था… READ MORE
हिन्दी अनुवाद – शिवांशु: भारत में असमानता: अरबपतियों की संपत्ति पर ऊंची जातियों का दबदबा! वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब की हाल… READ MORE
धर्मेन्द्र यादव: कचरा शब्द जैसे ही हमारे ज़ेहन में आता है, हमारे दिमाग में एक तस्वीर बनती हैं गंदगी, मैला,… READ MORE
आदिवासियों की सारी ज़मीन उनके हाथों से धीरे-धीरे निकलती जा रही थी। इन सब से परेशान आदिवासियों का गुस्सा उनके… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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