(आदिवासियों के लिए रोजगार बना अभिशाप) संजीव कुमार: रोज़मर्रा की इस भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में न जाने कितनी समस्याओं का… READ MORE
शंकर तड़वाल: भारत के देशज माने जाने वाले आदिवासी लोगों का अपना अस्तित्व बचाने के लिए अपनी ओर से अनेक… READ MORE
मधुलिका: 10 सितंबर सुबह 9 बजे हमारी एक 22 साल की युवा साथी उर्मिला, बिछीवाड़ा ब्लॉक हेड क्वार्टर में स्थित… READ MORE
युवानिया डेस्क : यह लेख लोकमत पत्रिका में से पुनः प्रकाशित हुआ है – माझे बालपण खेड्यात गेले. घरची परिस्थिती… READ MORE
गुफरान : यह पंक्तियाँ केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन हैं। इन्हें लिखने वाले थे जनता के गीतकार… READ MORE
हीरालाल: श्रावण का महीना शुरू होता है, प्रकृति नीली चादर ओढ़कर अपने आप को सुसज्जित कर लेती है। वृक्षों की… READ MORE
युवानिया डेस्क : अलीराजपुर, 3 जून नर्मदा बचाओ आंदोलन के एक अहम स्तंभ और मध्यप्रदेश के पहले डूब प्रभावित गाँव… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
Designed with WordPress