गिरीश कुमार: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के गोंड बाहुल्य आदिवासी गाँवों में कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि प्रकृति,… READ MORE
कोर्दुला कुजूर: झारखंड के सभी आदिवासी समाजों में बीज बोने की रीतियाँ और परंपराएँ लगभग एक जैसी हैं। साथ ही… READ MORE
हीरालाल लववंशी: हमारे क्षेत्र में खरीफ की फसल पूर्णतः बारिश पर आधारित है। कई बार बारिश के अभाव में बीज… READ MORE
जीवतलाल परमार: दक्षिण राजस्थान का आदिवासी अंचल अपनी समृद्ध संस्कृति, प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव और पारंपरिक कृषि व्यवस्था के… READ MORE
खीमा जेठी: उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ ज़िले के विकासखंड डीडीहाट की ग्राम पंचायत ओगला के तोक पाठक गाँव में रहने… READ MORE
कोर्दूला कुजूर: आषाढ़ महीना आते ही पानी बरसने पर किसान अपने खेतों को तैयार करने लगता है और बिचड़ा लगा… READ MORE
ज़ेबा वसी: अक्टूबर की हल्की ठंडी सुबह थी। जब मैंने दिल्ली से अयोध्या के लिए ट्रेन पकड़ी, तो मन में… READ MORE
गुफरान: अवध की धरती को लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब का पालना कहते हैं। यहाँ की रियासत का इतिहास सिर्फ़ नवाबी ठाठ-बाट… READ MORE
दीपक रंजीत : कैसे एक मृतप्राय आंदोलन को – “उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, उत्तराखंड मेरी पितृभूमि” – गीत गाकर फिर से… READ MORE
ख़ीमा जेठी: उत्तराखंड की सबसे कम जनसंख्या वाली जनजाति ‘राजी जनजाति’ है। यह जनजा ति एक अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत को… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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