ज़ेबा वसी: अक्टूबर की हल्की ठंडी सुबह थी। जब मैंने दिल्ली से अयोध्या के लिए ट्रेन पकड़ी, तो मन में… READ MORE
गुफरान: अवध की धरती को लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब का पालना कहते हैं। यहाँ की रियासत का इतिहास सिर्फ़ नवाबी ठाठ-बाट… READ MORE
दीपक रंजीत : कैसे एक मृतप्राय आंदोलन को – “उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, उत्तराखंड मेरी पितृभूमि” – गीत गाकर फिर से… READ MORE
ख़ीमा जेठी: उत्तराखंड की सबसे कम जनसंख्या वाली जनजाति ‘राजी जनजाति’ है। यह जनजा ति एक अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत को… READ MORE
अंतर निगवाले : बरखा आई धरती हँसी,घनघोर घटा गगन में बसी।ढोल मांदल बजे गाँव में,धरा में खेती किसानी हवाएं चलीहरिया… READ MORE
अमित : प्रतुल मुखोपाध्याय25 जून 1942 – 15 फ़रवरी 2025 मज़दूर दिवस के मौके पर प्रतुल मुखोपाध्याय के बारे में… READ MORE
सिम्मी एवं मानसी: दुनियाँ से लाइने हम हेर हेर फुलवा, दुनियाँ से लाइने हम हेर हेर फुलवाहमरे फुल बगिया मा… READ MORE
नरेश बिस्वास: जैव विविधता की चुनौती आज पूरी दुनिया में है। कुछ जैव विविधता तो इस धरती से लुप्त हो… READ MORE
युवानिया: ओडिशा से विश्व आदिवासी दिवस के जश्न की तस्वीरें मध्य प्रदेश से विश्व आदिवासी दिवस की झलकियाँ झारखण्ड में… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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