नरेश बिस्वास:

जैव विविधता की चुनौती आज पूरी दुनिया में है। कुछ जैव विविधता तो इस धरती से लुप्त हो गया है। और कुछ लुप्त होने के कगार में है। इसी सूचि में अभी मधुमक्खी शामिल है। 

मध्य भारत में एक जनजाति है जिसकी जीवन शैली और परंपरा में जैव विविधता संरक्षण है। यह आदिवासी समूह एक फूल खिलने पर एक त्यौहार मनाते हैं और यह फूल भी 9 साल में एक बार ही खिलता है, इसे बैगा लोग मोहती कहते हैं। जिस वर्ष यह फूल खिलता है उस साल को “मोहती साल” बोला जाता है। और जिस साल यह फूल खिलता है, उस साल बैगा आदिवासी समुदाय एक त्यौहार मनाते हैं जिसे “रसनवा” बोला जाता है। मोहती साल में, “रसनवा” मनाए बिना, शहद नहीं खाया जाता है। बैगा समुदाय मधुमक्खी को बैगाओं का सेना मानते हैं। है न जैव विविधता संरक्षण की यह एक अद्भुत परंपरा।!! 

इसी प्रथा को नरेश बिस्वास ने एक लघु फिल्म के माध्यम से डॉक्यूमेंट करने का प्रयास किया है। आप सब भी इस फिल्म को देखें और बैगा समुदाय की इस परंपरा के बारे में जानें – 

tradition of conservation

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  • नरेश बिस्वास एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने मध्य प्रदेश के मंडला ज़िले के आदिवासी क्षेत्र में स्थित गैर-सरकारी संगठन ‘निर्माण’ की स्थापना की है। वे पिछले तीन दशकों से बैगा आदिवासियों के कल्याण और विकास के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

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