सुरेश राठौर:

महिला मज़दूर सम्मेलन का कार्यक्रम मज़दूर दिवस के उपलक्ष्य में किया गया। जिसका उद्देश्य महिला श्रमिकों की समस्याओं को समझना और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना था।

यह कार्यक्रम राजातालाब ब्लॉक पर किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में महिला मज़दूरों ने भाग लिया और मनरेगा मज़दूर यूनियन और समता किशोरी युवा मंच के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मनरेगा मज़दूर यूनियन के संयोजक सुरेश राठौर जी और कई सामाजिक कार्यकर्ता और अधिकारी भी शामिल रहे।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य रोहनिया विधायक डॉ. सुनील सिंह पटेल को ज्ञापन पत्र देना था, जिसमें मज़दूरों की 7 मांगें थीं, जो इस प्रकार हैं –

  • मनरेगा कानून को बदलकर नया कानून लागू न किया जाए।
  • सभी मनरेगा मज़दूरों और संगठित मज़दूरों को एक दिन की मज़दूरी ₹800 निर्धारित की जाए।
  • सभी मज़दूरों का स्वास्थ्य कार्ड बनाया जाए और सभी तरह की जांच और दवाइयाँ सरकार द्वारा निशुल्क स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जाएँ।
  • सभी श्रमिकों का राशन कार्ड बनाया जाए और खाद्य तेल, रसोई गैस, दाल आदि सामग्री निशुल्क वितरित की जाए।
  • सभी मज़दूरों को साल के 200 दिन काम की गारंटी दी जाए।
  • 55 वर्ष से अधिक उम्र के सभी मज़दूरों को प्रतिमाह ₹5000 पेंशन दी जाए।
  • मज़दूरों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की व्यवस्था राज्य सरकार करे।

पुलिस अधिकारियों द्वारा इस कार्यक्रम को रोकने की बहुत कोशिश की गई। वे इस कार्यक्रम को किसी भी हाल में होने नहीं देना चाहते थे। लेकिन सुरेश राठौर जी और हमारे अन्य साथियों के अथक प्रयास के कारण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया गया और सरकार से हमारी मांगों को लेकर आवश्यक कदम उठाने के लिए भी कहा गया।

अंत में यह कार्यक्रम महिला मज़दूरों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इससे उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने की प्रेरणा मिली।

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  • सुरेश राठौर / Suresh Rathaur

    सुरेश राठौर बनारस, उत्तर प्रदेश में रहते है और नरेगा के अंतर्गत महिला मज़दूरों के मुद्दों पर काम करते है ।

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