सिम्मी एवं मानसी:

दुनियाँ से लाइने हम हेर हेर फुलवा, दुनियाँ से लाइने हम हेर हेर फुलवा
हमरे फुल बगिया मा मेर मेर फुलवा, हमरे फुल बगिया मा मेर मेर फुलवा

मानसी – सबहि लोगन का 

सिम्मी – अवध पीपल्स फोरम की तरफ से 

दोनों – ज़िंदाबाद

मानसी – हम आपन मह्दौना चौपाल से बात करत हई, हमार नाम मानसी और हमार नाम सिम्मी आहे। आप सबहि फैजाबाद अजोध्या के बारे बहुत कुछ जानत होबो, आओ हम तोहरे सबका अजोध्या से दूर एक छोटे और सुन्दर से आपन गाँव मह्दौना लई चली।

सिम्मी – इ जल वायु परिवर्तन खेल प्रक्रिया के दौरान हम सबहि मेहदौना गाँव के इतिहास के बारे में जाने समझे के कोशिश करेन, तो जान पाईन की मेह्दौना एक गढ़ रहा मतलब की राज्य इतिहास मा रही चूका आहे। आउर सबहीं लोग आज भी यका राजधानी कहत थीं।  

मानसी – आज हम तोहरे सबका मेह्दौना के कहानी बताउब मेह्दौना ग्राम पंचायत जाऊन आहे हियाँ लगभग 8000 लोग रहत थीं। हियाँ सब जात धरम के लोग रहत थीं। छोटा बड़ा मिलाये के 9 पुरवा बाए मतलब अलग अलग जाति कै आधार पर मोहल्ला आहे। हमरे मेह्दौन मा लोगन खेती किसानी करत थीं। आउर हियाँ मेहरारू लोग बीड़ी बानवे के काम करत थीं।  

सिम्मी – ज्यामीदातर आदमी लोगन देश प्रदेश मा काम करे जात थीं। बहुत बड़ी आबादी हमरे जइसन लड़की और मेहरारू लोगन घर मा रहत थीं। इनही लोगन बच्चन के पर्बरिस और खेती कै काम करत थीं आउर हम सबहि जब इन लोगन से बात करेन और देखेन समझेन तो पता लाग की खेतवा मा लगत बढ़ते जात बाए और इ पूरी लगत से कौनो फायदा नहीं होवत बाए। इ देखो फोटो, इनके 5 बिगहा खेत बाए जेहमा 10 कुंटल चावल होत रहा। 10 कुंटल मतलब 1000 किलो, चावल इनका मिल जात रहा तो, खरीफ की फसल बढियाँ होवे के मतलब इनका खाए के लिए आनाज मिल जात हे, आउर जाऊं खाए से बच जात रहा, ओका बेचकर रबी कै अगली फसल के बोआई कर लेत रहें। अबकी बार तो कटाई के बखत असमय बारिश होई गई और सगरो धान ख़राब होए गवा।  तो इनके परबर अब साल भर का खाइये।  

मानसी – आउर आगली फसल के लिए जाऊं पैसा लगे ऊ कहाँ से आये। एके लिए उनका कहूँ से लोकल बियाजू पर पैसा लेक पड़े। जाउने हिसाब से पाला पडत आहे, रबियो मा भी पाला लग सकत आहें। ऐहसे इनका घर परबर का खाए के लिए अनाज मा मुस्किल आउर लोकल बियाज के परेशानी आलग से होए। तो इनके सब के काव होई हमरे समुदाय के लोग तो इ सब जाऊन मौसम में बदलाव होत बाए ओकरे बारे मा जानत थी। उनका सबहि का ए पता बाए की कौन से मौसम मा कौन सा फसल लगावेक बा।

सिम्मी – इ तो पाहिले के बात बाए लेकिन जाऊन तरह मौसम्वा रंग दिखावत बाए जाऊन हम लोगन के बुढ़ पुरनिया के ज्ञान कौसल रहा ऊ इत्ती बखत इ सब ज्ञान कौसल काम नहीं करत बाये। एहसे खेती किसानी मा तो परेशानी आवत आहें। 

मानसी – आउर जाऊन अलग काम होत थे जैसे बीड़ी बनावे कै काम मह्रार्रुये लोग करत आहें। बीड़ी कामगार महिलाए जो अपन घर दुवार के काम के साथै साथै 5 से 6 घनटा बनावे के काम करत थी। इतनी देर काम करे के बादो 50-60 रूपए कमाए पावत थी। इ साल जेह्मा खूब गर्मी भई आहे। उन सबहि से अपने घर मा काम नहीं होए पावत थे। आउर जयादा आमदानी भी नहीं होए पावत है। ज्यदा गर्मी के मारे कहू निकले के नहीं होए पावत रहा। घर मा बिजलियों नहीं आवत रही जैसे तैसे 3-4 महिना मुश्किल से बीता।

सिम्मी – ई खेती किशनी और जाऊन बीड़ी बनावे वाली मेहरारू आहें उनके खातिर हम सबहि एक खेती किशनी विकास निगरानी सीमित बनाई जाए। लोगन के साथै मा मिल कै ई समिति काम करें। वन्ही पंचायत के लोगन आगे आये के काम करिहे और लोगन से भी जुड़ाव होई। अपने संसाधनों से अपने खातिर रहे की जगह का प्राकृतिक तौर पर पर बनावे का काम किया जाए। हियाँ गाँव के जो संसाधन बाए ओका बढियां से देख रेख किया जाए। आधुनिक जमाना मा सरपट बांस पैरा (धान की जाड़ें) इके सबके अच्छे से बचाए। इ सबसे एक सामूहिक समझ बने और गाँव के लोग इस दिशा में काम कर सकिहे। एके साथ ही सबहि लोग अपने बीड़ी के काम करे की जगह बनाउबे। जाऊन पैरा बांस से बने। जेमान सबहिं मेहरारू और लैकियन मिलकर ठंडी जगह पर आपन काम करिएह। 

मानसी – ऐके साथ ही खेती किसानी विकास निगरानी समिति गाँव मा जल  वायु बदलाव से होई रहे आकलन का संकलन करते हुए ग्राम पंचायत समिति के साथ मिलकर जो सरकारी प्रावधान क्षतिपूर्ति के लिए बनाया गया हैं। उसके लिए सामूहिक तौर पर प्रयास करेगी। जिससे जो नियम हैं, उसके अनुसार हियान के लोगन का क्षतिपूर्ति मिल सके। ऐके लिए सबहि लोग ग्राम पंचायत से लेकर ब्लाक और जिला स्तर पर पैरवी करके लोगन का क्षतिपूर्ति दिलावे का काम करिहें। ऐमा पीड़ित लोगन भी शामिल रहिये। ऐसे ऊ लोग क्षतिपूर्ति मिले के बाद अपन आगे से बढियाँ खेती किसानी करे के काम कर सके। 

सिम्मी – यहके साथै साथै जाऊन गाँव मा चिरई कौवा जानवर रहे वाहू सब खतम होय जात आहे। ज्यादा गर्मी बाये अऊर मेर मेर के दवाई खेत मा सबही दरात आहे, जैसे सब निक पसू पक्षी किरवा सब मर जताहे अऊर ऑकरे वजह से फसल लगावे मा  दिक्कत होत आहे। मेर मेर के दवाई डारे की वजह से पसू पक्षी कै नौकसान होत आहे।

मानसी – अऊर दवाई वाली सब्जी खाए के लोगन का भी नुकसान होत बाये। रुपया पैसा भी खूब खरच होत आहे। यही लिए ह्मरे लोगन के कॉमेटी सबही खेत वालों से बात करेन अऊर मीटिंग के माध्यम से कीटनाशक ना डारेन पए राजी करेन अऊर चिरई कौवा सबका बचावे पर ध्यान दियो अऊर सबका बताओ खेती केतना जरूरी बाये ह्मरे सबके लिए।

सिम्मी – ऐके अलावा जाऊन बहुत तेज गर्मी होत आहे, ओमा लोग बहुत परेशान होत ही। ओके लिए हम सबहि अपने निगरानी समिति जाउन ताल लताईया आहे, आउर जाउन उसर बनज़र ज़मीन आहे ओका आबाद करे के लिए काम करिहें। एसे आस पास के गाँव मा भी अपने ताल तालाईया का फिर से जीवित करे कै काम होई आउर जाऊन गर्मी मा पानी कै समस्या होत हे ओसे भी निजात मिले।   

दिनों – तोहरे सबन का धन्यवाद

Authors

  • सिम्मी, फैज़ाबाद उत्तर प्रदेश से हैं। वह अवध पीपुल्स फोरम के साथ जुड़कर युवाओं के साथ उनके हक़-अधिकारों, आकांक्षाओ, महिलाओं के सवाल, शिक्षा, स्वास्थ्य, और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम करती हैं।

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  • मानसी मठिया मेहदौना बारुन बाजार की रहने वाली हैं। उन्होंने मास्टर केमिस्ट्री में किया है। पिछले 3 सालों से अवध पीपल्स फोरम के साथ जुड़ कर लड़कियों-महिलाओं के साथ उनके शिक्षा, स्वास्थय और सामाजिक मुद्दों पर काम करके उनकी समस्याओं को समझने और सुलझाने का काम कर रही हैं। मानसी ने सामाजिक परिवर्तनशाला में भी भाग लिया है। इस तरह से वैज्ञानिक चेतना को जानते समझते वो समुदाय के साथ भी काम करते हुए इससे बढ़ावा दे रही हैं।

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