मधुलिका: 

10 सितंबर सुबह 9 बजे हमारी एक 22 साल की युवा साथी उर्मिला, बिछीवाड़ा ब्लॉक हेड क्वार्टर में स्थित हमारे सेंटर से स्कूटर निकालकर रोड पर ले आई। कारियावर (मृत्युभोज) के कार्यक्रम की वजह से रोड ब्लॉक था तो उसे स्कूटर रोककर खड़ा रहना पड़ा। तभी 2 पुरुष उर्मिला के पास आए और पूछने लगे “तुम इधर क्या काम करते हो, धर्म का प्रचार करते हो?” उर्मिला प्रश्न को ठीक से समझ नहीं पाई। उन 2 लोगों के उस पर हावी होने वाले हावभाव से वो घबरा गई, पर उसने शांति से हमारा पूरा काम उनको समझाया – “हम अलग-अलग गाँव में नरेगा में काम करने वाली महिलाओं को पूरा काम मिले और उसके पूरे पैसे मिलें, इसके लिए उनके साथ काम करते हैं। हमारे साथ सभी धर्म की महिलाएं जुड़ी हैं, पर हम किसी धर्म का प्रचार नहीं करते हैं।”

इस घटना के बाद उर्मिला मीटिंग में हमारे साथ जुड़ी, पर हम में से किसी को उसने इस घटना के बारे में कुछ नहीं बताया और शाम को रोज़मर्रा की तरह बिछीवाड़ा में हमारे सेंटर पर चली गई। थोड़ी देर बाद जब वह किसी काम से मकान मालिक की दुकान पर गई तो मकान मालिक ने कहा “यहाँ सब कह रहे हैं कि तुम धर्म प्रचार करते हो, परिवर्तन करते हो, क्या काम करते हो? इस उम्र में मुझे जेल में डालेंगे तो मैं क्या करूँगा? मैं आकर देखना चाहता हूँ तुम्हारा क्या काम चलता है।” उर्मिला ने फ़िर एक बार उन्हें भी हमारे काम के बारे में समझाया। उसने ये भी कहा कि दिन में सेंटर पर जब वह होगी तो वे आकर काम देख सकते हैं। हिम्मत से जवाब तो दिया, पर वह समझ नहीं पाई कि अचानक ऐसी बात क्यूँ कर रहे हैं। पर उनके पूछने का ढंग, और व्यवहार उसको ठीक नहीं लगा।

उस रात वह सेन्टर पर नहीं रुकी, 6 किमी दूर स्थित अपने घर चली गई। घर जाकर उसने मुझे फ़ोन किया “सुबह से एक बात मेरे दिमाग में घूम रही है, आज अचानक सुबह और शाम लोग मुझे धर्म प्रचार के बारे में पूछ रहे हैं, कोई धर्म का नाम भी ले रहे हैं, जो मुझे समझ में भी नहीं आया” उसने दोनों घटनाएं बताई तो मैंने कहा कि वहाँ संगठन के किसी साथी को तुम्हारे पास बुला लेना या मैं खुद कहूँ? उर्मिला ने कहा मुझे समझ में नहीं आ रहा था पर डर लगा तो मैं घर पर आ गई। उर्मिला को पता नहीं था कि 9 सितंबर 2025 को राजस्थान विधानसभा ने ‘धर्मांतरण विरोधी विधेयक, 2025’ पारित किया है और कुछ लोग/संगठन इससे अति उत्तेजित होकर गैरकानूनी, गैरसंवैधानिक रवैया अपनाकर धर्म की राजनीति कर रहे हैं।

उर्मिला 4 साल पहले कंप्युटर सीखने आई थी। जब हमारे पास पहली बार आई तब वह BA कर रही थी। उर्मिला के मामा अशोक जी कई सालों तक बिछीवाड़ा ब्लॉक में वन अधिकार के लिए चल रहे संघर्ष में प्रमुख साथी रहे हैं। उस विश्वास के साथ उर्मिला को उन्होंने हमारे पास भेजा। उर्मिला के पिता TB से पीड़ित थे। कोविड के समय दवाइयां नहीं मिलने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। उस से पहले 3 साल उनके इलाज में परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हो गया। उर्मिला की माँ, शारदा बहन, और उर्मिला के ऊपर कर्ज चुकाने और घर चलाने का भार था। साथ में उर्मिला के छोटे भाई-बहन की पढ़ाई की प्लानिंग और ज़िम्मेदारी भी उर्मिला पर थी।

इन चार सालों में उर्मिला कंप्युटर सीखी, यूनियन के साथ घुमक्कड़ ई-मित्र चलाया, बहुत ज़िम्मेदारी, प्रेम, आदर और धैर्य के साथ साथियों की समस्याओं का समाधान किया, 12 वीं में अच्छे प्रतिशत मिलने पर पुरस्कार स्वरूप मिली स्कूटी सीखी, सामाजिक काम के संबंध में अनेक प्रशिक्षणों में शामिल हुई, बहुत सारी दोस्तियां बनाई, रुचि से किताबें पढ़ने लगी, अपनी मूकबधिर बहन के लिए 12वीं के बाद की पढ़ाई के रास्ते खोजे, और अब यूनियन के गाँवों में युवा क्लब चलाने का प्रयास कर रही है। सरकारी नौकरियों की भर्ती निकलती है तो इस सब के साथ उसकी भी तैयारी करती रही है। अगले साल वो APU भोपाल से MA करना चाहती है। उसके दिमाग़ में जब से इस खयाल ने घर किया तब से उसने 2-3 साथियों को कंप्युटर सिखाना शुरू किया ताकि उसकी जगह वो साथी यूनियन के साथ काम करें। इतना कुछ सीखने, समझने और काम करने के बाद अभी भी वो दूसरों को देख कर यही कहती कि – “वो इतना सारा काम कैसे कर लेते हैं। “

मुझे हमेशा लगता कि उर्मिला का स्वभाव एक कमल या अरवी के पत्ते पर पानी की बूँद जैसा है। दुनियादारी में दोगलापन, कुटिलता उसको समझ में नहीं आती। उसकी बातें और सोच एकदम फ्रेश। काम में भी बचाव के लिए बात को तोड़मरोड़ के कहना उसको आता नहीं है। जो दिल और दिमाग में है, वो मुँह पर है। उसको काम सीखते समय मुझसे जो डांट मिलती, उसका उसको बुरा तो लगा होगा, पर हमेशा उसने उसके पीछे कारण देखा और ठीक करने की कोशिश की। ऐसी सीधी-सादी, मेहनती और दुनियादारी में शातिरदारी से दूर लड़की को जब कोई राह चलते रोककर अपने हावभाव और बॉडी लैंग्वेज से प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो वह उस सवाल के पीछे छिपी राजनीति या मंशा कैसे समझेगी? उसने सच और ईमानदारी से बस इतना ही कहा – ‘हमारे साथ सभी धर्मों की महिलाएं जुड़ी हैं, मगर हम किसी भी धर्म की वकालत नहीं करते।

एक बार नहीं, बार-बार कहना चाहती हूँ, याद करना चाहती हूँ – एक आदिवासी युवा महिला सामाजिक कार्यकर्ता, जो अपनी पहचान, अपने काम, दोस्ती, पढ़ाई, संगठन के आधार पर अभी-अभी बनाने लगी है वो उस प्रश्न “तुम धर्म प्रचार करते हो?” का कितना सटीक स्पष्ट और शानदार जवाब दिया “हमारे साथ सभी धर्मों के लोग जुड़े है” यही हम सब का भी जवाब है – “सभी धर्म के लोग हमारे साथी है।”

Author

  • मधुलिका, एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे राजस्थान के डूंगरपुर जिले, और दक्षिण क्षेत्र में  राजस्थान असंगठित मज़दूर यूनियन और जंगल जमीन जन आंदोलन, के साथ जुड़ कर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उनके कार्य का मुख्य केंद्र असंगठित मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा और वनधिकार समुदायों के हितों को मज़बूत करना है।

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One response to ““हमारे साथ सभी धर्मों के लोग जुड़े हैं।” – सामाजिक कार्यकर्ता उर्मिला का बयान ”

  1. Sanjiv Agrawal Avatar
    Sanjiv Agrawal

    बहुत ही अच्छा लिखा है, मानवता और गरीब लोगों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

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