राकेश जाधव (आरटीजेडी):

जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ यहाँ लड़ते हैं,
कुछ समझौते करते हैं।
कुछ खुद के लिए लड़ते हैं,
कुछ दूसरों के लिए मरते हैं।

जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ भाग जाते हैं युद्ध मैदान छोड़कर,
कुछ मृत्यु से भी भिड़ जाते हैं घुटने टेककर।
कुछ लड़ते हैं तीर-तलवारों से,
कुछ लड़ते हैं अपने विचारों से।

जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ यहाँ रणनीति बनाते हैं युद्ध की।
कुछ को जीत से फर्क नहीं पड़ता,
नहीं फर्क पड़ता कौन जीतेगा या हारेगा।
केवल लड़ते हैं, क्योंकि वे लड़ना जानते हैं।

जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ यहाँ जीतते हैं, कुछ हारते हैं,
कुछ जीतकर हारते हैं,
कुछ हारकर जीतते हैं।
हार-जीत के मायने क्या हैं?
कुछ सीखते हैं, कुछ सीखते दिखते हैं।

जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ गरजते हैं आंधी बनकर,
कुछ बहते हैं दरिया की तरह।
कुछ घातक सन्नाटे की तरह,
कुछ बरसते हैं आँसू बनकर।

जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ यहाँ कृष्ण हैं, कुछ अर्जुन।
कुछ सारथी बनकर राह बताते,
कुछ स्वार्थी होकर राह बनाते,
कुछ रह जाते हैं वीरान बनकर।

जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!

Author

  • राकेश, मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले के ग्राम देवली के निवासी हैं। वर्तमान में वे बड़वानी ज़िले के शासकीय शहीद भीमा नायक महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं साथ ही लेखन कार्य में भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं। राकेश, साकड़ के आधारशिला स्कूल के भूतपूर्व छात्र रह चुके है। प्रतिलिपि जेसे प्रसिद्ध प्लेटफार्म पर राकेश की कुछ रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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