राकेश जाधव (आरटीजेडी): जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!कुछ यहाँ लड़ते हैं,कुछ समझौते करते हैं।कुछ खुद के लिए लड़ते… READ MORE
राकेश जाधव: नोट : यह लेख गाँव की एक वास्तविक घटना पर आधारित है। मैंने इस घटना को केवल एक… READ MORE
राकेश जाधव: कहते हैं – ‘लेकिन’ से पहले कही गई सारी बातें झूठी होती हैं,और यह बात सच भी प्रतीत… READ MORE
राकेश जाधव: लिखते-लिखते कोरे कागज ख़त्म हो गए थे, मैंने फ़टाफ़ट अपने ढीले कपड़े खूंटी पर लटकाए और झोला उठाकर… READ MORE
राकेश जाधव: एक स्कूल ऐसा भी….!जहाँ पढ़ाई कम और पढ़ना ज़्यादा है।जहाँ अध्ययन कम और रटना ज़्यादा हैं।जहाँ सभ्याचार की… READ MORE
आर.टी.जे.डी: हम तो दीवाने रहे हैं किताबों केजानें कैसे रहे हैं बिन पढ़ेन रह सकेंगे बिन पढ़े।इंतज़ार है उस घड़ी… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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