जलेश्वर महतो: आसार सावन भादों, होवत नखे खेत कादो,खेत में बीड़ा सुखथे,आरी बैठी किसान रोजे कांदथे,कहत में बीड़ा सुखथे…… ।।1।।… READ MORE
नंदिनी शर्मा : कभी-कभी बातों से लड़-झगड़कर उलझनों में गुम हो जाते हैं….सब की खुशी का ध्यान कर फिर न… READ MORE
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सदरे आलम: मैं हूँ बवानाबवाना पुनर्वास कॉलोनीकुछ लोग मुझे बवाना जे. जे. कॉलोनी के नाम से भी पुकारते हैंमुझे कहाँ-कहाँ… READ MORE
प्रथ्वीराज सिंह: ” कुछ पल भले हीमृत्यु के होंहोते हैं उत्सव जैसे जैसे रात सोयेखाने के बाद औरसुबह की चाय… READ MORE
सलोमी एक्का: मुर्गे की बांग सुनकरभोरे उठकर सबके लिएभोजन पकाती।झटपट-झटपट घर का काम निपटाती,साग-भात टिफिन में भरकरनिकलती काम की तलाश… READ MORE
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हफ्सा नाज़: कभी हम पर हँसती है, तो कभी हमे हँसाती है,यह ज़िंदगी हर रोज़ नए रंग दिखाती हैl पल… READ MORE
युवानिया डेस्क (री-पोस्ट): रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित “दीन दान” एक सामयिक कविता है। रवीन्द्रनाथ टैगोर “दीन दान” कविता के माध्यम… READ MORE
गोपाल पटेल: ज़िंदगी हमारीइम्तिहान ले रही।सब्र हमाराधैर्य को परख रहा। वाज़िद होकर भी,इस डगर कोअपने आप हीसंभाल रहे हम… लक्षित… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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