गोपाल पटेल:
ज़िंदगी हमारी
इम्तिहान ले रही।
सब्र हमारा
धैर्य को परख रहा।
वाज़िद होकर भी,
इस डगर को
अपने आप ही
संभाल रहे हम…
लक्षित राह पर
उलझनों भरी
दास्तां के साथ
चल रहे हैं हम …
राहों को खोजने
निकल पड़े हैं हम।
उलझनों को सुलझानें
निकल पड़े हम…
ये परीक्षा है
ज़िंदगी थोड़ी,
परीक्षा का दौर मिलता है बार-बार
जिंदगी नहीं….
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View all postsगोपाल, मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले से हैं। वर्तमान में वे कलाम फाउंडेशन से जुड़कर लोगों की मदद कर रहे हैं। साथ में गोपाल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहें हैं।

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