प्रकृति पुकारे…!

मैं प्रकृति हूँ…आओं मुझे संवार लोमैं सुरक्षित रहूंगी तोतुम संरक्षित रहोगे। मैं प्रकृति हूँ…मैं सदियों से लालन-पालन करते आ रही हूँ।मैं “प्रत्याशाओं” से भरी हूँ…मुझ

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ज़िंदगी में रिश्तों की अहमियत

गोपाल पटेल: इस दुनिया में रिश्ते बनाना आसान है, लेकिन रिश्तों को निभाना बहुत कठिन है। जो इसकी अहमियत जानता है , वही इसे इत्मिनान

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माँ प्रकृति – एक कविता

गोपाल पटेल: माँ प्रकृति ने पाला मुझे,संवारा है, बड़ा किया है। लालन-पालन भी किया तूने,मुझे इतना प्रेम दिया तूने.. । क्या कहूँ तेरी इस रहनुमाई

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जंगल बचाओ, जीवन बचाओ

गोपाल पटेल; कृष्णा सोलंकी: मैं बक्सवाहा का जंगल हूँ,जो भी कोई जीव मेरी गोद में समाए हुए हैं,मैं उनका लालन-पालन करती हूँ। आज मुझे बचा

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