गोपाल पटेल: ज़िंदगी हमारीइम्तिहान ले रही।सब्र हमाराधैर्य को परख रहा। वाज़िद होकर भी,इस डगर कोअपने आप हीसंभाल रहे हम… लक्षित… READ MORE
गोपाल पटेल: मैं परीक्षा हूँ, परायों की इच्छा हूँ, लोग मेरी इच्छा करते हैं। मुझे पाने की ओर, जिद्दजहत करते… READ MORE
गोपाल पटेल: साहब यहाँ तो घोषणाएँ होती हैं।अमल होना तो, बाकी है। बेरोज़गार युवा आस लगाए बैठे हैं।इस उम्मीद में…कि… READ MORE
मैं प्रकृति हूँ…आओं मुझे संवार लोमैं सुरक्षित रहूंगी तोतुम संरक्षित रहोगे। मैं प्रकृति हूँ…मैं सदियों से लालन-पालन करते आ रही… READ MORE
गोपाल पटेल: इस दुनिया में रिश्ते बनाना आसान है, लेकिन रिश्तों को निभाना बहुत कठिन है। जो इसकी अहमियत जानता… READ MORE
गोपाल पटेल: मैं वृक्ष हूँ, इस माटी का x2जो मुझे सींच कर रखती है।मैं वृक्ष हूँ इस माटी का जो मुझे… READ MORE
गोपाल पटेल: माँ प्रकृति ने पाला मुझे,संवारा है, बड़ा किया है। लालन-पालन भी किया तूने,मुझे इतना प्रेम दिया तूने.. ।… READ MORE
गोपाल पटेल; कृष्णा सोलंकी: मैं बक्सवाहा का जंगल हूँ,जो भी कोई जीव मेरी गोद में समाए हुए हैं,मैं उनका लालन-पालन… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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