ରାସ୍ତା କଡର ଜୀବନ୍ रास्ते (सड़क) के किनारे का जीवन

ଡୋଲାମଣି:

ନା ଅଛି ଛାତ ନା ଅଛି କାନ୍ଥ ତଥାପି ଚାଲିଛି ରାସ୍ତା କଡରେ ସର୍ବହରାକଂ ଜୀବନ
ନା ଅଛି ଶିକ୍ଷା ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଶୁଦ୍ଧ ପିଇବା ପାଣି ଶୁଦ୍ଧ ପରିବେଶ ଖାଦ୍ୟ ଓ ମକାନ୍
ତଥାପି ଚାଲିଛି ରାସ୍ତା କଡରେ ସର୍ବହରାକଂ ଜୀବନ   ।। 
ନା ଅଛି ଆଧାର କାର୍ଡ଼ ରାସନ କାର୍ଡ ଭୋଟର କାର୍ଡ ଭତ୍ତା କାର୍ଡ
ସେମାନେ ସବୁ ଯୋଜନା ରୁ ବଂଚିତ
ହେଲେ ତାକଂ ଲାଗି ଯୋଜନା ମାଲମାଲ
ତଥାପି ଚାଲିଛି ରାଜ ରାସ୍ତା କଡରେ ସର୍ବହରାକଂ ଜୀବନ   ।। 
ସେ ରାସ୍ତା ଯାଏ ରାଷ୍ଟ୍ରପତି ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆଉ କେତେ ମନ୍ତ୍ରୀ ଯନ୍ତ୍ରୀ
ସମସ୍ତେ ଦେଖନ୍ତି ରାଜ ରାସ୍ତା କଡରେ ସର୍ବହରାକଂ ଜୀବନ୍
ହେଲେ କେବେ ପରିବର୍ତ୍ତନ ହୁଏନି ସର୍ବହରାକଂ ଜୀବନ୍ ରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ।। 
ଧନୀ ପୁଂଜିପତିଙ୍କ ପୁଂଜି ବଢାଇ ବାରେ ଦିଆଯାଏ ଜମି ହଜାର ହଜାର ଏକର
ହେଲେ ରାସ୍ତା କଡର ସର୍ବହରା ମୁଣ୍ଡ ଗୁଂଜି ପାଇଁ ଚାରି ଡିସମିଲ ଜାଗା ସାତସପନ
ତଥାପି ଚାଲିଛି ରାଜ ରାସ୍ତା କଡରେ ସର୍ବହରାକଂ ସଂଘର୍ଷମୟ ଜୀବନ୍  ।। 
ତାକଂ ଠୁ  ଛଡେଇ ନିଆଯାଇଛି ବଂଚିବାର ସମସ୍ତ ଅଧିକାର
ତଥାପି ଚାଲିଛି ରାଜ ରାସ୍ତା କଡରେ ସର୍ବହରାକଂ ଜୀବନ ଓ ସଂସାର  ।। 

हिंदी अनुवाद –

रास्ते (सड़क) के किनारे का जीवन

डोलामणि:

ना छत है, ना दीवारें हैं, फिर भी रास्ते (सड़क) के किनारे सर्वहारा जीवन जी रहे है
ना शिक्षा है, ना स्वच्छ पेयजल, या वातावरण, भोजन और आश्रय 
फिर भी जी रहा है सर्वहारा रास्ते के किनारे का जीवन
ना तो है आधार कार्ड, ना ही राशन, वोटर और भत्ता कार्ड,
वे सभी योजनाओं से वंचित हैं
जबकि, उसके लिए योजना बहुत सारी हैं
फिर भी जी रहे हैं सर्वहारा रास्ते के किनारे पर ह।
इस रास्ते में, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और कई अन्य मंत्रि जन आते-जाते रहते हैं,
रास्ते में सब लोग देखते हैं,
लेकिन सर्वहारा के जीवन में कभी कोई बदलाव नहीं आया।
हजारों एकड़ जमीन अमीर पूंजीपतियों को दी जा रही है
लेकिन सर्वहारा के रहने के लिए ज़मीन मिलती नहीं 
फिर भी रास्ते के किनारे जीने के लिए संघर्ष जारी है।
उससे जीवन के सारे अधिकार छीन लिए गए हैं
फिर भी जिंदगी और दुनिया हाईवे के किनारे हैं।
छिन के ले गए जिनके सब अधिकार 
फिर भी रास्ते किनारे जीने के लिए संघर्ष जारी है….

फीचर्ड फोटो आभार: विकिपीडिया और टाइम्स ऑफ़ इंडिया

Author

  • डोलामणी, ओडिशा के बलांगीर ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं। वह ज़िन्दाबाद संगठन के साथ जुड़कर स्थानीय मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

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