विश्वजीत नास्तिक: रखा गया इन्हे कुछ इसतरह कि इन्हेपता ही न चलेवे किस नरक में जी रहे हैं। सरकारी कर्मचारी,… READ MORE
गोपाल पटेल: मैं परीक्षा हूँ, परायों की इच्छा हूँ, लोग मेरी इच्छा करते हैं। मुझे पाने की ओर, जिद्दजहत करते… READ MORE
यह कविता पावरी भाषा में लिखी गयी है। यह भाषा पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे लगे महाराष्ट्र के भील, पावरा… READ MORE
ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह: एक सदी से केवल घर की नींव पूजने वालों सुन लो;इक दिन तुमसे ये दीवारें कुंठित होकर… READ MORE
सौरभ: जब सडकें बनती हैंतब जाकर कोई शहरतरक्की की पहली सीढ़ी पाता हैतहसील ऑफिस के पासप्राइवेट बैंक का ब्रांच भीउसके… READ MORE
गोपाल पटेल: इस दुनिया में रिश्ते बनाना आसान है, लेकिन रिश्तों को निभाना बहुत कठिन है। जो इसकी अहमियत जानता… READ MORE
खेमलाल खटर्जी: मैं मज़दूर हूँ,ज़मीन से आसमान तक मशहूर हूँ।कभी लकड़ी का कोयला,तो कभी कोहिनूर हूँ।। डूबा हूँ मुश्किलों के… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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