तुम मौज उड़ाया करते हो

शुभम:

तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
यूं धुआं उड़ाए जाते हो, तेल का दाम बढ़ाए जाते हो
यूं लहू बहाए जाते हो, यूं स्वपन दिखाए जाते हो
यूं बेकद्री से जानता के अरमान जलाए जाते हो

तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
यूं तानाशाही करते हो, यूं धौष जमाया करते हो
यूं अक्सर भूखे पेटों पर तुम लात चलाया करते हो
रोजी-रोटी को खा जाते हो, लड़कों को मरवाते हो
जो एफआईआर या पीआईएल करदे उसे जेलों में सड़वाते हो

तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
यूं फौज बनाए रखते हो, निक्कर में टहला करते हो
“जिसकी लाठी उसकी भैंस”, तुम लाठी ले ले चलते हो
यूं बाते बड़ बड़ करते हो, जेबों को तुम बस भरते हो
यूं देश की बाते करते हो, दिलों को बांटा करते हो

तुम मौज उड़ाया करते हो,
तुम मौज उड़ाया करते हो,
यूं दिए जलाए जाते हो,
यूं जंगल काट गिराते हो,
यूं मतवाले हाथी जैसे बुल्डोजर चलवाया करते हो,
यूं शाम बिताया करते हो, यूं कर्कश तुम फैलाते हो,

तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
यूं बंदूकों की ताकत पर फैसले नचवाते हो,
कभी गाड़ी, कभी चॉपर तुम मन मर्जी उड़वाते हो,
एक अंधी माँ जो भारत है, उसके बच्चे खा जाते हो,

तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
यूं खबर बनाया करते हो,
यूं लूट-पाट मचाते हो,
सड़कों को चौड़ा करके लोगों के घर गिरवाते हो,
है मीत तुम्हारा दुश्वारी, पर बड़का मंगल करवाते हो,
हर कदम तुम्हारा दुश्वारी, जो बोले उसे मार गिरते हो

तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
ये लाल लहू की बात नही, तुम लहुओं की नदी बहाते हो,
ये जात -पात की बात नहीं, अमीरों को अमीर बनाते हो
हथकरघा हो या मदरसे, मुसलमानो को खूब डराते हो
ये आवारा जनता भोली, इससे कत्ल-ए-आम करवाते हो

तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
यूं सीसीटीवी का कहके, महिलाओं को आंख लगाते हो
मोबाइल टैबलेट दे के, आईटी सेल मजबूत बनाते हो
हर युवा पर नज़र तुम्हारी, गोपनीयता खा जाते हो
तुम एकलौते सांड सही, है गईया पर नजर गड़ाते हो,
गौशाला-गौशाला कहके, जमीनों को नाम लिखवाते हो

तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम जान के कारोबार सही, लिखदे जो उसे छत से फेकवाते हो
धर्म कर्म की बात बोलके लोगों को लड़वाते हो
ब्राह्मण को हाथ दिलाते हो, दलितों को पिटवाते हो
अरमानों और अशकों पर राजनीति अपनी चलाते हो,
420 स्कीम तुम्हारी तुम 420 सी कहलाते हो
आज़ादी की बातें करके, खामोशी सिखलाते हो,
तुम संविधान जलाते हो
तुम संविधान खा जाते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो
तुम मौज उड़ाया करते हो

Author

  • शुभम, उत्तर प्रदेश से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह अवध पीपुल्स फोरम के साथ जुड़कर युवाओं के साथ उनके हक़-अधिकारों, आकांक्षाओ, और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम करते हैं।

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