छोटूसिंह रावत : जहाँ न भीड़ हो, न शोर हो,बस हवाओं में ख़ामोशी का जोर हो,उस जगह पर हम हों।जहाँ… READ MORE
संजीव कुमार : कुछ पल बैठूं तेरे साथबयां करूं अपने हालत,जिंदा हूं कैसे यह,सहकरज़बरन भ्रष्टाचारी कुविचार। कह रहे हैं लोग… READ MORE
नंदिनी शर्मा : आज का युवा परेशान है, अपनी खुशी की तलाश में।उलझे जहाँ में ज़िद मन-मर्जी करने वाला,युवा आज… READ MORE
उमेश भट्ट ग्वाला : आज एक कविता के प्रत्युत्तर में कुछ पंक्तियां यूँ ही लिख दी थी। एक मित्र की… READ MORE
अंतरसिंग निगवाले: मैं संघर्ष से नहीं डरतामैं भारत का आदिवासी हूँ।मैं प्रकृति की आंचल में रोज जीता हूँ।अपनी सांस को… READ MORE
युवानिया डेस्क (री-पोस्ट): रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित “दीन दान” एक सामयिक कविता है। रवीन्द्रनाथ टैगोर “दीन दान” कविता के माध्यम… READ MORE
गोपाल पटेल: ज़िंदगी हमारीइम्तिहान ले रही।सब्र हमाराधैर्य को परख रहा। वाज़िद होकर भी,इस डगर कोअपने आप हीसंभाल रहे हम… लक्षित… READ MORE
ଜାକିଣ୍ଟା କେର୍କେଟା : ମା!ତୁ ଏମିତି ରାତିସାରାକାହିଁକି ଅପେକ୍ଷା କରୁଛୁ?ମହୁଲ ଫୁଲ ଗୁଡ଼ିକ ତଳେପଡ଼ିଲା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ!ଗଛରୁ ଛିଣ୍ଡାଇ ଆଣି ଦେଉନୁ! ପ୍ରଶ୍ନ ଶୁଣି ମା କହେ,ଇଏ ରାତି… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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