हसदेव बचाओ पदयात्रा: जंगल बचाने के लिए गाँधीवादी सत्याग्रह

मोहन:  जल-जंगल-ज़मीन बचाने के लिए हसदेव बचाओ पदयात्रा की शुरुआत 4 अक्टूबर को हसदेव अरण्य क्षेत्र के मदनपुर गाँव के उस स्थान से हुई, जहाँ साल

Continue reading

क्यों अडिग है किसान आंदोलन ?

अरविंद अंजुम: आप जानते ही हैं कि पिछले 9 महीने से भी ज़्यादा समय से किसान तीन कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य

Continue reading

हरेली त्यौहार, संगठन कार्यकर्ता पर फर्जी कार्रवाई और आदिवासियों की ज़मीन से बेदखली पर छत्तीसगढ़, म. प्र. और बिहार से स्थानीय खबरें

गाँव-गाँव में मनाया गया हरेली त्यौहार  -(छत्तीसगढ़) हरेली छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा व संस्कृति का पहला राजकीय त्यौहार है। हरेली इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस

Continue reading

आज भी हमें डर है – कविता

जेरोम जेराल्ड कुजूर: आज भी हमें डर है।हमारी ज़मीन पर,हम खुशहाल थे,धान, मडुवा, गोंदली, मकई सेलहराते थे हमारे खेत,देख हम सभी,संग झूमते- नाचते थे अखरा

Continue reading

आदिवासियत को बचाने में अहम भूमिका निभाती ढास/लाह प्रथा

सुरेश डुडवे: आदिवासी समाज में शुरुआत से एक दूसरे के सुख-दुःख को अपना समझ कर चलने की विशेषता रही है, वह आज भी बरकरार है।

Continue reading

क्या हीरा खनन की भेंट चढ़ जाएंगे मध्य प्रदेश के बक्सवाहा के जंगल?

वीरेंद्र दुबे: मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले में स्थित बक्सवाहा के जंगल, दमोह और पन्ना ज़िलों से लगे हुए हैं, जहाँ पर हीरा खनन परियोजना

Continue reading

1 2