चित्तौड़गढ़ की कविता भील की लॉकडाउन में बच्चों को पढ़ाने की पहल

कविता भील: मेरे गाँव का नाम पीरखेड़ा है जो ग्राम पंचायत फाचर अहिरान में आता है। हमारी तहसील का नाम निम्बाहैड़ा है और हमारा ज़िला

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“अफसोस की बात है कि छुआछूत आज भी हो रहा है”: मधु भील

मधु भील: जाति शब्द तो आप सभी जानते हैं। हर समाज – भील, मीणा, मेघवाल, खटीक, हरिजन आदि, जातियों के लोगों को नीचा मानता है।

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बस एक दिन…!

पावनी: छूना है आसमान, उन उड़ते परिंदों की तरह,मुझे भी एक दिन..।  उन छोटी-बड़ी मछलियों की तरह,देखनी है सागर की गहराइयाँ,मुझे भी एक दिन..। उन छोटे-बड़े

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गुलामगिरी पुस्तक – जातीय शोषण से लड़ने का ज़रूरी वैचारिक हथियार

अमित: आज भी देश के गाँवों में ऐसा माहौल है कि एक दलित किसी उच्च जाति के लोगों के ख़िलाफ़, बिना पिटने की संभावना के

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चित्तौड़गढ़, राजस्थान से लॉकडाउन की कहानी, साथी की ज़ुबानी

गीता साल्वी: गीता, चित्तौड़गढ़ के भदेसर के आधारशिला बालिका स्कूल में शिक्षिका के तौर पर काम कर रही हैं। हमने 18 अप्रैल 2020 से मास्क

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