आरज़ू :

मेरा नाम आरज़ू है, मैं अयोध्या ज़िले से हूँ और अभी पढ़ाई कर रही हूँ। मेरे घर पर हम छः लोग हैं- मम्मी-पापा, दो भाई और हम दो बहने हैं। मेरी अम्मी स्कूल टीचर हैं, अब पापा की तबियत अच्छी नहीं रहती है, जिसके कारण वह अब किसी भी प्रकार का काम नहीं कर पाते हैं। भाई पढ़ाई कर रहा है। मैं जब से समझने-जानने लायक हुई हूँ, मुझे किसी भी प्रकार की परेशानी देखने को नहीं मिली। मैंने अपनी पढ़ाई  प्राइवेट स्कूल से की, क्योंकि उस स्कूल में मेरे दूर के रिश्तेदार (जो मेरे मामा लगते हैं), वो काम करते थे। अम्मी का कोई भी भाई-बहन नहीं था, जिसके कारण अम्मी को मेरे मामा का सपोर्ट मिलता था और उन्हीं के स्कूल में मैंने और मेरे भाई-बहन सभी ने अपनी पढ़ाई की और किसी की भी पढ़ाई में फीस भी नहीं लगी।

जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया तो उसमें एक वर्ष की फ़ीस एक साथ देनी होता थी, जो थोड़ी बड़ी रकम होती है। तब से मुझे फीस देने में परेशानी होने लगी क्यूँकि हम भाई-बहन एक-दो साल ही छोटे-बड़े थे, तो सभी स्कूल से कॉलेज में आने लगे, इसलिए एक साथ फीस देने में भी बहुत  दिक्कत होने लगी। फिर एक दिन, गुफरान भाई के बारे में मुझे पता चला। उनसे संपर्क में आने से, परिवार में पढ़ाई के रास्ते फिर खुलने के अवसर बने, जब उन्होंने शिव नादर यूनिवर्सिटी (दिल्ली में एक विश्वविद्यालय) द्वारा स्कॉलरशिप दिलवाई। छात्रवृति प्राप्त कर मेरे भाई ने कॉलेज में अपना दाखिला करवाया। वहाँ पर वाटर साइंस एक कोर्स है जिसमें मेरे भाई ने पढ़ाई की है। मेरे भाई सरताज को दिल्ली में पढ़ने का मौका मिला, तो मुझे भी कुछ हद तक छूट मिली घर से बाहर निकलने की और मैंने अवध पीपुल्स फॉर्म के कार्यालय जाना शुरू किया।

पहले वहाँ पर मुझे कुछ समझ में नहीं आता था, ‘यह सब क्या है?’ यह प्रश्न मेरे दिमाग में हमेशा चलता रहता था। स्कूल में तो पढ़ने का मन नहीं करता था, अब यहाँ भी पढ़ना पड़ता है! दो से चार घंटा बैठना अच्छा नहीं लगता था। लेकिन कुछ समय बाद थोड़ा बहुत काम करने लगी और अपने आस–पास के ग्रामीण क्षेत्र के बारे में जाना और उनके रहन-सहन, खान-पान को समझने की कोशिश की। तब मुझे लगा कि काम करने की ज़रूरत है, जिससे उन लोगों की कुछ तो परेशानी दूर हो सके। फिर पता चला कि इस क्षेत्र में काम करते-करते, कई जगह घूमने का, नए-नए लोगों से मिलकर, उनको जानने का अवसर मिलता है। क्योंकि मुझे घूमना और नए लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता है, तो तब से मैं संगठन के साथ जुड़ कर ही काम कर रही हूँ।

संगठन के ज़रिये मुझे काम करते हुए मुझे बहुत सारी नई चीज़ें जानने-सीखने को मिल रही हैं| बहुत सारे नए मौके मिल रहे हैं, जिसे लेकर बहुत उत्साह है। आशा है कि ऐसे ही नई-नई चीज़ें सीखने-समझने करने को मिलती रहेंगी।

Author

  • आरज़ू, उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद की युवा कार्यकर्ता हैं जो महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े हक-अधिकारों पर प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र से जुड़े समुदायों को संभालती हैं। किशोरियाँ लगातार पढ़ाई से जुड़ी रहे दिलकुशा, धारा रोड में इनका यही प्रयास रहता है। साथ ही आरज़ू अवध पीपुल्स फोरम संस्था के साथ मिलकर यह किशोरियों की शिक्षा को बुलंद करने का काम करती हैं।

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