उ.प्र. चुनाव से क्या हैं फैज़ाबाद की किशोरियों की उम्मीदें?

प्रेरणा किशोरी विकास केंद्र से: 

(श्रुति सोनकर, इकरा, आकांक्षा, शिवा, जागृति, आरजू, मोनी आदि)

उत्तर प्रदेश के चुनाव में अलग-अलग स्कूलों और समुदायों की किशोरियों की मांगे:

“समाज का एक बड़ा वर्ग, मेरे आस-पड़ोस के लोग इस बार वोट दे रहे हैं अलग-अलग मुद्दों पर। कुछ लोगों का मुद्दा है कि राम मंदिर बनेगा और हिंदू राष्ट्र बनेगा। तो कुछ लोगों का मुद्दा है कि भाजपा को हटाना है, इसलिए कट्टरपंथ के खिलाफ़ वोट देंगे। मेरी जैसी किशोरियों का यह मानना है कि लॉकडाउन में सबसे ज़्यादा परेशानी घर में रहने वाली किशोरियों को हुई है। घर में ज़्यादा-ज़्यादा काम करना पड़ता था और स्कूलों से नाम भी काफ़ी लोगों का कटवाया गया है। अब इस चुनाव में मुद्दा ही होना चाहिए कि स्कूलों में किशोरियों को मुफ़्त शिक्षा  मिले।” हमारी मांगे –

  • स्कूलों में साफ़ वॉशरूम सुनिश्चित किए जाए।
  • स्कूलों में काउंसलर की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए। 
  • स्कूलों में हेल्प लाइन नंबर शुरू किया जाए। 
  • स्कूलों में किशोर-किशोरियाँ को आयरन और फोलिक ऐसिड की नीली गोली हर हफ्ते उपलब्ध कराई जाए। 
  • स्कूलों में एनीमिया स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जाए।  
  • स्कूलों में सभी किशोरियों को सैनिटेरी पैड दिए जाए।
  • स्कूलों में पीयर ग्रुप एज्यूकैटर बनाएं व उन्हे कार्यरत करें। 
  • स्कूल में पुस्तकालय हो जहाँ साहित्य, इतिहास और दर्शन की किताब उपलब्ध हों।
  • स्कूल में खेल के मैदान हों और किशोरियों में खेल को बढ़ाया जाए।
  • स्कूल द्वारा स्लम्स का दौरा कराया जाए जिससे समुदाय और स्कूल के बच्चों में बंधुता बढ़े और वो गैरबराबरी को समझ सकें।
  • विकलांग या दिव्यांग छात्रों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाए जाएं जिससे उन्हें खुद क्लास में आने में दिक्कत नहीं हो।
  • जेंडर फ्रेंडली स्पेसेस हों स्कूलों में।
  • स्कूल में कॉमन रूम हों।
  • प्राकृतिक संरक्षण को छात्रों में बढ़ाने के लिए प्राकृतिक कार्यशालाएं हों स्कूलों में।

स्कूलों में शौचालय, विद्यार्थियों के लिए संक्रमण का प्राथमिक स्रोत हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैला सकते हैं। स्कूल के शौचालयों रोगजनक होते हैं क्योंकि नम और आद्र होने के कारण यह हानिकारक सूक्ष्म जीवों के लिए आदर्श प्रजनन स्थल हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं और यह कभी-कभी गर्म भी होते हैं।

शौचालय भले ही स्कूल के सबसे छोटे कमरे हो सकते हैं, लेकिन विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और खुशी पर उनका सबसे बड़ा प्रभाव हो सकता है। स्कूल में शौचालय की स्थिति को लेकर कई अभिभावक और छात्र चिंतित हैं। हम आभारी होंगे यदि प्रधानाध्यापक और स्कूल प्रशासन सभी विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ स्थान बनाने के लिए शौचालयों के पूर्ण नवीनीकरण करें।

धन्यवाद।

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