तय करो किस ओर हो तुम: बल्ली सिंह चीमा की कविता

युवानिया डेस्क: बल्ली सिंह चीमा का जन्म 2 सितम्बर, 1952 में चीमाखुर्द गाँव, अमृतसर ज़िला, पंजाब में हुआ था। इनकी माता का नाम सेवा कौर

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पिता की शराब की लत के सज़ा बुगत रहे हैं अररिया, बिहार के यह मासूम

विजय:  साथियों, बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है। केवल लिखने  से इसका हल नहीं होगा, इस पर हम सभी साथियों को काम करना

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हम आदिवासी, हमारा समाज और हमारी परम्पराएँ

देवानंद बोयपई: आदिवासी शब्द को तोड़कर देखें तो, आदि+वासी – यानि जल जंगल और ज़मीन पर आदि काल से निवास करने वाले विशेष समुदाय। इनका

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कैसे मनाया गया देशभर में विश्व आदिवासी दिवस: फोटोस्टोरी

युवानिया डेस्क: ओड़िशा आदिवासी चेतना संगठन द्वारा विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत किया गया एक गीत आदिवासी चेतना संगठन द्वारा विश्व आदिवासी दिवस

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आदिम संताल – संथाली कविता

पतिचरण मुर्मू: आदिवासी संताड़ सामाज कहानी।आबो संताड़ को ताहेंकाना राजा, रानी ।।ताहेंकाना को किसकू समाज।दिशोमरे ताहेंकाना अनकुवाः राज।।ताहेंकाना आबोवाः चाईगाड़।ताहेंकाना आबोवाः चाम्पागाड़।।आबोवाः गे ताहेंकाना कश्मीर।ओनागे

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गुनाईन ननोत: कुड़ुख़ कविता

कोर्दुला कुजूर: विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष कविता कुड़ुख़ भाषा में इन्ना एन्देर उल्ला  इन्ना एन्देर उल्ला सोहन बरा पाड़ोत बेचोत बरे नालोत तोकोत खुसमार’ओत

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