उत्तर प्रदेश के जनसंस्कृति के वाहक राजबली यादव

अफ़ाक उल्लाह: उत्तर प्रदेश के अविभाजित फ़ैज़ाबाद ज़िले में जन्मे राजबली यादव 15 अगस्त 1947 को मिली आज़ादी को मुकम्मल नहीं मानते थे। वो आज़ादी

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धर्मों का बदलता स्वरूप आज एक चिंता का विषय है 

अफ़ाक उल्लाह: हम सभी किसी न किसी धर्म से जुड़े हुए हैं। हमारे प्रत्येक क्रियाकलाप में धार्मिक मान्यताएं शामिल हैं। पर हम जो देखते हैं

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उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद शहर की विरासत

अफाक़ उल्लाह: चौक एज में घंटाघर से गुलाबबाड़ी की तरफ़ जाते हुए बायें हाथ पर एक 1920 के करीब शुरू हुई छोटी सी दुकान है।

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महंगाई खा गई छोटे मेलों को!

अफ़ाक उल्लाह: कई दिनों से बाराबंकी के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनकर (हथकरघा) समुदाय के लोगों के साथ मिल-जुल रहे हैं। घूमते-घूमते हम मुश्कबाद गाँव में

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समुदाय के लिए चलती-फिरती लाइब्रेरी: एक अनूठी पहल

अफ़ाक उल्लाह: पुस्तकें इंसानों की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। अच्छी पुस्तकें ज्ञानवर्धन के साथ-साथ भाषा कौशल और शब्दावली विकसित करती हैं तथा तनाव को

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