राकेश जाधव: कहते हैं – ‘लेकिन’ से पहले कही गई सारी बातें झूठी होती हैं,और यह बात सच भी प्रतीत… READ MORE
Aali Dadhich : I have always wondered about how the idea of land as a resource-static, permanent, something to be… READ MORE
ज़ेबा वसी: अक्टूबर की हल्की ठंडी सुबह थी। जब मैंने दिल्ली से अयोध्या के लिए ट्रेन पकड़ी, तो मन में… READ MORE
श्रुतिका शाह : लहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?मैं पूछता हूँलहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?नब्ज़… READ MORE
अभिषेक दास: ओमप्रकाश वाल्मीकि, हिंदी दलित साहित्य के प्रमुख लेखकों में से एक हैं जिन्होंने कविताएं लिखीं, ‘ठाकुर का कुआं’… READ MORE
सिम्मी व आफ़ाक़: वैसे तो पहाड़ों के साथ अपना रिश्ता कोई नया नहीं हैं। हिमाचल से उत्तराखंड और नेपाल के… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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