संथाल आदिवासी समुदाय ऐसे मानता है सोहराय पर्व

युवानिया डेस्क:  सोहराय पर्वसे संथाल आदिवासियों का एक प्रमुख पर्व है। इस पर्व को मनाने का मुख्य कारण धान पकाने में मदद करने के लिए

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बारेला समाज की महिलाओं का जीवन

सुरेश डुडवे: बारेला समाज, मध्यप्रदेश के बड़वानी, खरगोन, धार एवं झाबुआ जिलों में मुख्यत: निवास करता है। माना जाता है कि भील से ही भिलाला

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छत्तीसगढ़ का लोकगीत – सुवा गीत

दुर्गा दिवान: कार्तिक माह की अमावस के दिन छत्तीसगढ़ में दिवाली मनाई जाती है। दिपावली के दिन चारों तरफ दिया की रौशनी की जगमग होती

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सोहराय पर्व – संथाल आदिवासी समुदाय का त्यौहार

लालमोहन मुर्मू: सोहराय एक संथाल आदिवासी समुदाय का त्यौहार है। हिन्दू लोग इस पर्व को दिवाली कहते हैं लेकिन यह हिंदुओं की दिवाली से अलग

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चित्तौड़गढ़ के गावों की दिवाली – आधारशिला स्कूल की लड़कियों के आलेख

विषमता उजागर करता दिवाली का त्यौहार मधु भील: मैंने अपने गाँव में दिवाली के त्यौहार को विशेष त्यौहार के रूप में मनाते नहीं देखा। मेरे

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मध्यप्रदेश के भील, बारेला, भीलाला आदिवासियों का बैलों का त्यौहार – दिवावी

शिवजी किराड़े: मध्यप्रदेश में आदिवासी (भील, बारेला, भीलाला) समाज में दीवावी एक अनोखा त्यौहार है। आदिवासी समाज में दीवावी का सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है।

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