जगदीश सिंह सरदार:
अस्तित्व में अवस्थित प्राकृतिक पंच तत्वों से हमारी सृजन हुई है।
इसी कारण गर्व से हमे प्रकृति से बेइंतहा प्रेम हुई है।।
हम आदिवासी प्रकृति के उपासक हैं, हम आदिवासी तो प्रकृति के पूजक हैं।
प्रकृति ही जीवन की जीवन रेखा है,
प्रकृति के बिना संसार में जीवन असंभव है।।
प्रकृति है तो मानव जीवन सहित अन्य जीवन का अस्तित्व है।
इसी कारण हम आदिवासी, प्रकृति की पूजा सदियों से करते आये हैं।।
कही – अनकही, सुनी – अनसुनी यह ना कोई कहानी है।
प्रकृति के संग हमारी अनमोल रिश्ता सदियों पुरानी है।।
हम आदिवासी दुनिया को व्यवस्थित समाज और समानता में रहना सिखाया है।
ज्ञान और विज्ञान की शुरुआती पाठ हम ही ने दुनिया को पढ़ाया है।।
मन में ना कोई लोभ ना कोई लालच और ना ही कोई ईर्ष्या है।
सौर – सरावा, मोह – माया से दूर रहना यही हमारी स्वभाव है।।
सरल और सादगी से भरी हमारी जीवन है।
वनवासी नहीं हमारी पहचान तो आदिवासी है।।

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