युवानिया डेस्क : यह लेख लोकमत पत्रिका में से पुनः प्रकाशित हुआ है – माझे बालपण खेड्यात गेले. घरची परिस्थिती… READ MORE
शैलेश सिंह: संगीत दिवस के दौरान मेरा मिलना तीन नए साथियों से हुआ, यह तीन साथी महिमा, मैरी और खुशबू… READ MORE
श्रुति संस्था के साथी महिपाल ‘मोहन’ ने खेमराज भाई के रोज़ाना के फेसबुक स्टेटस को कहानियों के रूप में संकलित… READ MORE
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ज्योति व शैलेश, बहराइच, उत्तर प्रदेश मुझे मेला देखना और मेले में छोटे-छोटे सामान खरीदना बहुत ज़्यादा पसंद है। जब… READ MORE
किसी तरह अनामिका का मामला सुलट तो गया, लेकिन इसमें न फंसती तो अनामिका जैसी तेज़ लड़की कितना कुछ कर… READ MORE
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नौशेरवाँ आदिल: नेता लोग कहते हैं कि गरीबी नहीं है। जो भी लोग गरीब हैं वह कामचोर हैं, आलसी हैं… READ MORE
अमित: ये कहानियाँ 1997 में पश्चिम चंपारण ज़िले में गाँव की मीटिंग में सुनीं थीं। स्कूल के कमरे में एक… READ MORE
कुछ सुनी, कुछ आँखों देखी – अस्सी – नब्बे के दशक में पश्चिम मध्य प्रदेश के आलीराजपुर ज़िले में खेडुत… READ MORE
उमेश ढुमणे: आपल्या देशात संविधान/लोकशाही आहे। डॉ। बाबासाहेबांनी सांगितलं आहे। संविधान कितीही चांगलं असो पण संविधान चालवणारे लोकं जर वाईट… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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