उमेश ढुमणे: आपल्या देशात संविधान/लोकशाही आहे। डॉ। बाबासाहेबांनी सांगितलं आहे। संविधान कितीही चांगलं असो पण संविधान चालवणारे लोकं जर वाईट… READ MORE
नहीं, ये मेरे देश की आँखें नहीं हैंपुते गालों के ऊपरनकली भवों के नीचेछाया प्यार के छलावे बिछातीमुकुर से उठाई… READ MORE
प्रशीक वानखेड़े: मेरे शहर में भी एक मंदिर बना दो, हर मुश्किल का समाधान वही हैं। नष्ट होती फसलों का, … READ MORE
मिथुन: गरीबी और जाति का बड़ा ही गहरा रिश्ता है, और ऐसा ही रिश्ता है जाति और अशिक्षा का। जहां… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
Designed with WordPress