संजीव कुमार: सहरिया जनजाति, जो PVTG की सूची में शामिल है, यह देश की अत्यंत पिछड़ी जनजातियों में से एक… READ MORE
कोर्दुला कुजूर: जल, जंगल, ज़मीन का संघर्ष आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण संघर्ष रहा है। दुनिया के सभी आदिवासी अपने जीवन… READ MORE
अब पुराने मकान की मरम्मत का समय आ गया है! अल्बर्ट बिलुंग: आदिवासी समाज, केवल जनजातियों विशेष से निर्मित समाज… READ MORE
ज़ेनिथ संस्था: सहरिया समुदाय मध्य प्रदेश में निवास करने वाला एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) और वन-निवासी… READ MORE
श्रीपति सिंकू: ଆଦିବାସୀ ସମାଜ ପ୍ରକୃତିର ଏକ ଅଙ୍ଗ ହୋଇ ଆଦିମ କାଳରୁ ରହି ଆସିଛି।ବଣ, ଜଙ୍ଗଲ ଓ ଜଙ୍ଗଲରେ ବସବାସ କରୁଥିବା ଜୀବ ଜନ୍ତୁ ମାନଙ୍କ… READ MORE
जंग हिन्दुस्तानी: शिवालिक की हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे जंगल में सदियों से रहने वाले वन गुज्जर परिवारों के बच्चे किताबों… READ MORE
मनीषा शहारे : महुआ के पेड़ को आप सभी लोग जानते ही होंगे। यह ग्रामीण क्षेत्रों, जंगलों और खेतों में… READ MORE
डॉ. रिचर्ड टोप्पो एवं जेरोम जेराल्ड कुजूर: पलामू व्याघ्र परियोजना दिन प्रतिदिन लातेहार ज़िले के आदिवासियों के लिए परेशानी का… READ MORE
दीपक रंजीत : कैसे एक मृतप्राय आंदोलन को – “उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, उत्तराखंड मेरी पितृभूमि” – गीत गाकर फिर से… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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