मधुरेश कुमार : सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना…अवतार सिंह ‘पाश’ अनिल चौधरी उर्फ़ अनिल दा, ऐसे… READ MORE
विश्व आदिवासी दिवस पर एक सवाल हम आदिवासियों की तरफ सेअरविंद भगत: आज पूरी दुनियामना रही हैआदिवासी दिवसनिकल रहे हैं… READ MORE
मानस भारद्वाज: अब जब जंग का वक़्त चल रहा हैमैं प्यार की बात कर रहा हूँमैं एक सैनिक हूँ…जब कोई… READ MORE
नौशेरवां आदिल: न जलसों से न जुलूसों से,न दरगाह पर चादर फूल चढ़ाने से, पूजा से न आरती से,न भगवान… READ MORE
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साधना: एक सज्जन रेलवे स्टेशन पर बैठे थे और गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। तभी जूते पालिश करने वाला… READ MORE
पावनी लोधियाल: कहीं धारों से, कहीं कुओं से,कहीं नहरों से, तो कहीं लहरों से,कहीं पानी, कहीं जल, तो कहीं नीर… READ MORE
धनक संस्था द्वारा साझा की गयी – भारती बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली 21 साल की लड़की है जिसे पानीपत… READ MORE
डॉ. नेरन्द्र दांभोळकर: मूर्तियाँ पूजने के बजायमैं मानव पूजता हूँकृत्रिम देवों को न मानकरमैं फूले-शाहू-अंबेडकर को पढ़ता हूँमैं छाती ठोककर… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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