साधना: 

एक सज्जन रेलवे स्टेशन पर बैठे थे और गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। तभी जूते पालिश करने वाला एक लड़का आकर बोला, “साहब जूते पालिश कर दें?” उसकी दयनीय सूरत देखकर उन्होंने अपना जूता आगे बढ़ा दिया और बोले, “तो ठीक से चमकाना”। लड़का ने काम तो शुरू किया परंतु अन्य लोगों की तरह उसमें स्फूर्ति नहीं थी, यह देख साहब बोले, “कैसे ढीले से काम करते हो! जल्दी हाथ चलाओ।” यह सुनकर वह लड़का मौन रहा, इतने में एक दूसरा लड़का आया उसने इस लड़के को तुरंत हटाया और स्वयं फटाफट काम में जुट गया। 

पहले वाला गूंगे की तरह एक और खड़ा हुआ था, और दूसरे लड़के ने साहब के जूते चमका दिए। अब साहब सोचने लगे कि पैसे किसको देने हैं? इस पर विचार करते हुए साहब ने सोचा कि पैसे के लिए दोनों में झगड़ा होगा, मारपीट होगी। फिर उन्होंने तय किया कि जिसने काम किया, उसको ही पैसा देना चाहिए इसलिए उन्होंने बाद में आने वाले लड़के को पैसे दे दिए। उस लड़के ने पैसे लिए और पहले वाले लड़के की हथेली पर रखे, प्रेम से उसकी पीठ थपथपाई और चल दिया। 

यह सब देखकर साहब ने उस लड़के को तुरंत वापस बुलाया और पूछा कि यह क्या चक्कर है? लड़का बोला, “साहब यह 3 महीने पहले चलती ट्रेन से गिर गया था, इसके हाथ-पैर में बहुत चोटें लगी थी, लेकिन यह बच गया। वृद्ध माँ और बहन का क्या होगा, यह सोचकर वह बूट पॉलिश का काम करता है, बहुत स्वाभिमानी है इसलिए किसी से भीख नहीं मांगता है।” 

वह लड़का फिर बोला, “साहब यहाँ जूते पॉलिश करने वालों का समूह है और इसमें बड़े प्यारे इंसान हैं जिन्हें सब लोग चाचा जी कहते हैं। वह बहुत अच्छे हैं और हम लोगों को बताते हैं कि कोई काम समूह बनाकर करेंगे तो जल्दी होगा। इस लड़के के साथ हुए हादसे के बाद उन्होंने कहा कि यह अब पहले की तरह सही से काम नहीं कर पाएगा, तो यह हमारे लिए अपने साथी के प्रति त्याग भावना, स्नेह, सहानुभूति और एकता का भाव प्रकट करने का एक अवसर है। हम सब साथियों ने मिलकर तय किया कि हम सभी अपने-अपने एक जोड़ी जूते पॉलिश करने से मिले पैसे प्रतिदिन इसे दिया करेंगे और जरूरत पड़ने पर इसके काम में सहायता भी करेंगे।” जूते पालिश कराने वाले के दल में आपसी प्रेम, सहयोग, एकता तथा मानवता की ऐसी ऊँचाई देखकर वे साहब चकित रह गए, उन्होने खुशी से उसकी पीठ थपथपाई और सोचने लगे कि शायद इंसानियत अभी ज़िंदा है।

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  • साधना, उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले से हैं। वह सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं और साथ ही अपने क्षेत्र में ज़मीन, मज़दूरी जैसे विषयों व महिलाओं, युवाओं के साथ संविधानिक मूल्यों और अधिकारों पर काम कर रही हैं।

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