नौशेरवां आदिल:
न जलसों से न जुलूसों से,
न दरगाह पर चादर फूल चढ़ाने से,
पूजा से न आरती से,
न भगवान को चुनरी चढ़ाने से,
मोमबत्ती जलाने से न सेलेब पूजने से,
धर्म संसद चलाने से न माथा टेकने से,
न ईश्वर,अल्लाह, गॉड (God), के नाम पर
जान लेने और देने से,
इंसानियत तो बच सकती है
केवल सदभाव और प्यार मोहब्बत से,
केवल प्यार मोहब्बत से …..।
बिना भेदभाव के, बिना सीमा सरहद के
कर प्यार तू सारे जहान से
प्यार की रस्सी को थाम
कर ले नफरतों के दौर को पार तू।
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View all postsनौशेरवा आदिल अररिया बिहार से हैं और जन जागरण शक्ति मंच संगठन के साथ युवाओं के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। आदिल सामाजिक परिवर्तन शाला से भी जुड़े हैं।

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