दुलिचंद: मेरा नाम दुलिचंद है। मैं राजस्थान के झालावाड़ ज़िले से हूँ। वर्तमान में, मैं झिरी गाँव के मंथन स्कूल… READ MORE
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हमको लगता है कि अगर बच्चे कोई गलती करते हैं तो उनको बलभर मारना चाहिए। “बच्चे सीने पे चढ़के खाएं,… READ MORE
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अखिलेश: बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से लगभग 15-20 किलोमीटर दूर, गनियारी नाम का एक छोटा सा गाँव है। यहाँ एक जन स्वास्थ्य… READ MORE
विनोद: कौन कहता है कि आज़ाद हैं हम, यकीं मानो आज भी गुलाम हैं हम। कभी अंग्रेजों के तो कभी… READ MORE
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युवानिया डेस्क: 1. असम साइंस सोसाइटी, असम: असम साइंस सोसाइटी एक स्वैच्छिक संगठन है जिसे वर्ष 1953 में “गौहाटी साइंस… READ MORE
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अमित: दोस्तों, जब हमें कोई थप्पड़ लगाता है तो हमें बुरा लगता है, जब कोई हमें प्यार करता है तो… READ MORE
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सुमन: आज मैं कालू भील से मिलने गई थी तो उसने अपनी कहानी ऐसे सुनाई। “मेरी कहानी यह है कि… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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