अनूप उरांव: मानव की उत्पत्ति के क्षण से ही साहित्य का विकास भी होता गया। मानव के जन्म के साथ… READ MORE
जोवाकिम टोप्पो: लोकनृत्य और लोकगीत, आदिवासी जन-जीवन को उल्लासित करने का एक सर्वोत्तम माध्यम हैं। नृत्य, संगीत आदिवासी जीवन के… READ MORE
बाबूलाल बेसरा: जीते भोर हंसाईबो खेलायबो, मोरेलो गो माय कोइना सोंग। मोरेला गो माय धोरेरो आगीन, पोरेरो कपड़ा, बोनेरो काठी। … READ MORE
गोवर्धन: ऐ फाल्गुण-फाल्गुण करे छौरा, फाल्गुण-फाल्गुण करे छौरा। फाल्गुणियों फाडुके है, फोयरा** फकड़ भोइरा। उई, उई, उई।*** ऐ बी मुड… READ MORE
पावनी: उत्तराखंड में कई दंतकथाएं मौजूद हैं। दंतकथा मतलब ऐसी कहानियाँ या बातें जो कहीं लिखीं नहीं गई, किन्तु परंपरागत… READ MORE
गोवर्धन: मकर संक्रांति को हमारे क्षेत्र के भील आदिवासी उत्तरायण भी बोलते हैं। इसका शाब्दिक अर्थ सूर्य का वापिस उत्तर… READ MORE
सावन के समय छिंदवाड़ा (म.प्र.) में गाया जाने वाला एक लोकगीत झमको तो झमको वीरों सेजरो रे। कौन बहनी जाए परदेस… READ MORE
बीना कुमारी दंडपाट: सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी बीना, झारखंड के चाईबासा क्षेत्र से हैं। युवानिया के इस अंक के… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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