गोवर्धन:

मकर संक्रांति को हमारे क्षेत्र के भील आदिवासी उत्तरायण भी बोलते हैं। इसका शाब्दिक अर्थ सूर्य का वापिस उत्तर दिशा में प्रवेश करना होता है। मकर संक्रांति पर भारत में अधिकांश लोग पतंगबाज़ी करते हैं, परन्तु आदिवासी समाज में हम लोग ‘उत्तरायण’ यानी मकर संक्रांति के दिन सुबह-सुबह उठकर पक्षी पकड़ने जाते हैं। स्थानीय भाषा में इस पक्षी को ‘दिवी’ कहते हैं। पक्षी को जिंदा पकड़कर लाने के बाद, किसी एक घर में उस पक्षी को घी पिलाया जात है और उसके बाद उसे आकाश में वापिस छोड़ देते हैं। इसके बाद सब अपने-अपने घर वापिस लौट जाते हैं। 

मकर संक्रांति पर पारंपरिक खेल खेलते हुए

दोपहर को खाना खाने के बाद सब वापस एक जगह पर इकट्ठे होते हैं और सब मिलकर एक खेल खेलते हैं। इस खेल में एक चमड़े की बनी बड़ी गेंद लाई जाती है, यह चमड़े की गेंद यादव जाति के लोग बनाकर देते हैं। दो टीमें आमने-सामने होकर खेल खेलती हैं, जिसमें खिलाड़ी को लट्ठ से गेंद को मारना होता है। 100 से 150 मीटर तक दोनों तरफ बाउंड्री रखी जाती है और जो ज़्यादा गोल करता है, उसको विजेता मान लिया जाता है। दोनों टीमों को खेल के बाद मक्का भी दिया जाता है। महिलाएं और बच्चे इस खेल का आनंद लेते हैं फिर शाम को सभी अपने-अपने घर लौट जाते हैं। 

पुरुष लोग उस दिन महुए से बनी दारू का सेवन करते हैं, इस दिन खाने में दाल-बाटी बनाई जाती है। दाल उड़द की होती है और बाटी मक्के से बनती है। सब लोग अलग-अलग रंग के कपड़े पहन तैयार होते हैं और गाँव के युवा और वडिल (बड़ी उम्र के पुरुष) लोग माथे पर सफ़ेद रूमाल बांधते हैं। 

भारत में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई है, परंतु हमारे यहाँ पर आदिवासी लोग मकर संक्राति का पर्व 14 जनवरी के पहले पड़ने वाले शुक्रवार को मनाते हैं। भारत में इस समय सर्दी का मौसम होता है। आदिवासी लोग मानते हैं कि ‘उत्तरायण’ या मकर संक्रांति के दिन से ठण्ड कम हो जाती है, इसलिए इस पर्व को एक नए साल की तरह भी मनाया जाता है और इस दिन को ‘शुभ’ मानते हैं। इस दिन कुछ खाने की वस्तु गरीबों को दान में भी देते हैं।

Author

  • गोवर्धन / Govardhan

    गोवर्धन, राजस्थान के डूंगरपुर ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह वागड़ मज़दूर किसान संगठन से जुड़कर, गरीब, दलित, आदिवासी समुदायों के हक़ और अधिकार के लिए, संगठन के साथ जुड़ कर काम कर रहे हैं।

    View all posts

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading