होली के त्यौहार पर एक भीली गीत

गोवर्धन: ऐ फाल्गुण-फाल्गुण करे छौरा, फाल्गुण-फाल्गुण करे छौरा। फाल्गुणियों फाडुके है, फोयरा** फकड़ भोइरा।  उई, उई, उई।***  ऐ बी मुड वालो ढूल है छोरा, बी

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भील आदिवासी कुछ ऐसे मनाते हैं मकर संक्रांति

गोवर्धन: मकर संक्रांति को हमारे क्षेत्र के भील आदिवासी उत्तरायण भी बोलते हैं। इसका शाब्दिक अर्थ सूर्य का वापिस उत्तर दिशा में प्रवेश करना होता

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जागो रे जागो आदिवासी भाइयो, किमू हुता हो निद्रा माए

(भीली भाषा का यह गीत खासकर कॉलेज, चुनाव व सामाजिक कार्यक्रमों में गाया जाता है।) जागो रे जागो आदिवासी भाइयो, किमू हुता हो निद्रा माए।

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डूंगरपुर से फील्ड रिपोर्ट: रोज़गार के लिए प्रदर्शनरत छात्र-छात्राओं पर पुलिसिया हिंसा

काकरी डूंगरी, डूंगरपुर ज़िले में है। यहाँ कंकड़ और पत्थर की बहुतायत के कारण इसका नाम काकरी डूंगरी पड़ा है। यह हाइवे संख्या NH-8 पर

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