कोमल कुमारी:

प्रिय बापू,

मैं कोमल, जमशेदपुर के एक छोटे से कस्बे की निवासी हूँ। आपके जमशेदपुर आगमन को अब 100 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, जिससे मुझे काफी गौरवान्वित महसूस हो रहा है कि मैं जहाँ रहती हूँ, वहाँ आप जैसे महान व्यक्तित्व वाले पुरुष के कदम पड़े थे। जब आप जमशेदपुर आए थे, तब तो मैं इस दुनिया में नहीं थी, न ही आपके जीवनकाल में, परन्तु अब मैं भी आपके जैसे एक सच्ची देशभक्त बनना चाहती हूँ।

बापू, मैं पूरे विश्वास के साथ कहती हूँ कि अगर मैं उस दौर में होती, तो आपके सामाजिक कार्यों, आंदोलनों आदि में आपकी बड़ी सहायता करती।

बापू, आप अपने ज़माने के स्वतंत्रता सेनानी थे, मैं इस ज़माने की बनना चाहती हूँ। आज बड़े दुःख के साथ बता रही हूँ, बापू, कि आपने जिस भारत की कल्पना की थी, जिस भारत के लिए इतना संघर्ष किया था, आज उस भारत के सपूत बड़े स्वार्थी हो गए हैं और आपके आदर्शों को भूलते जा रहे हैं।

बापू, मुझे इस बात का बहुत दुःख है कि मैं आपसे मिल नहीं सकी। आज इस देश के लोग केवल अपनी माँ-बहनों का आदर करते हैं, और दूसरों के साथ तुच्छ व्यवहार करते हैं। ये केवल धन-दौलत के पीछे भाग रहे हैं। इनमें शिष्टाचार खत्म होता जा रहा है, बापू, इस बात का मुझे बड़ा दुःख होता है। मैंने अभी ज्यादा दुनिया नहीं देखी है, लेकिन जितना देखा है, उसके हिसाब से बता रही हूँ कि मुझे इस देश के संविधान की, यहाँ के लोगों की बड़ी चिंता होती है।

संविधान के नियम अब केवल किताबों में ही सीमित रह गए हैं। भारत के संविधान की प्रस्तावना में भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने की बात कही गई है। आज आपके आदर्शों और संविधान के तहत चुने हुए लोग ही इसका उल्लंघन कर रहे हैं। राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता दाँव पर लगी है। भारत कागज़ों पर तो लोकतंत्र बन गया, परन्तु अंदर से खोखला होता जा रहा है। बापू, क्या आपने इस देश के लोगों को अंग्रेज़ों की गुलामी से इसलिए आज़ाद करवाया था कि यहाँ की सरकार ही लोगों के अधिकारों का हनन करे? बापू, अगर आज आप होते तो अवश्य ही इनके विरोध कुछ-न-कुछ करते। परन्तु आप परेशान न होइएगा, आज भी कई लोग आपके आदर्शों का पालन करते हैं।

बापू, एक समस्या अब भी बड़ी चिंतामयी है, जातिवाद। हालाँकि सरकार इसके लिए काफी प्रयास कर रही है, परन्तु आम जनता में इसकी समझ नहीं है। आज भी हमारे देश में जाति-धर्म के नाम पर लड़ाइयाँ होती रहती हैं। धर्म, धर्म के नाम से याद आया, बापू, क्या आपने भारत के आज़ाद होने से पहले मोहम्मद अली जिन्ना को मुसलमानों को अलग राष्ट्र देने का वादा किया था? वैसे मैंने अभी इस पर पूरी खोज-पड़ताल नहीं की है, परन्तु कुछ ही दिनों में अवश्य कर लूँगी।

सच्चाई तो यह है, बापू, कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बहुत दयनीय है और इन सारी परिस्थितियों की मार आम जनता झेल रही है। बापू, काश आपने पाकिस्तान को हिन्दुस्तान से अलग होने से बचा लिया होता। तो आज इतने सारे युद्ध नहीं होते और इतने सारे मासूमों की जान नहीं गई होती। अगर आप होते तो इन हालातों को देखकर आपको भी बहुत दुःख होता।

बापू, एक समस्या हमारे परिवारों में भी है, आज लोग अपने से आगे किसी को नहीं देखना चाहते हैं। बापू, आज हम टेक्नोलॉजी में तो काफी विकसित हो गए हैं, परन्तु लोगों में शिष्टाचार, आदर, सम्मान सब खत्म होते जा रहे हैं।

बापू, क्या मैं इन हालातों को अकेले बदल सकती हूँ? मुझे भारत से बहुत प्रेम है, हमारा देश हर गुणों में उत्तम है, परन्तु यहाँ की सरकार के भ्रष्टाचार के कारण सही मायने में विकसित नहीं हो पा रहा है।

आज आपके सपनों का भारत इस हालात में पहुँच चुका है। बापू, जैसे आप 100 साल पहले आए थे, वैसे एक बार फिर आ सकते हैं क्या? जब आप अब के लोगों को देखेंगे, तो खुद आपको समझ आ जाएगा।

खैर, आपको मेरा सत्-सत् नमन। आपका व्यक्तित्व मुझे काफी पसंद है।

Author

  • कोमल कुमारी / Komal Kumari

    कोमल झारखण्ड के जमशेदपुर की रहने वाली हैं और सामाजिक मुद्दों को एक युवा नज़रिए से देखने और समझने में रुचि रखती हैं। लेखन के माध्यम से वे अपने विचारों, सवालों और अनुभवों को लोगों तक पहुँचाना चाहती हैं।

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