कोर्दुला कुजूर: (कुड़ुख कविता) अयंग गही लोला चोन्हा अयंग नमन मेख़ा लगी ब’आ लगी,चोआ हरो हे ओरमा आलारों निजड़ा नीम… READ MORE
अरविंद अंजुम: बेरोज़गार युवा विस्थापित संगठन की ओर से रोज़गार की मांग अब ज़ोर पकड़ने लगी है। ये युवा उन… READ MORE
डेज़ी कुजूर: अपने आस-पास चल रही हलचल से थोड़ी असमंजस हुई कि आखिर दूसरे कमरे में यह किसकी आवाज़ है,… READ MORE
विजय सोलंकी: आज हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं, जहां मेहनत तो हर कोई कर रहा है परंतु… READ MORE
जोवाकिम टोप्पो: लोकनृत्य और लोकगीत, आदिवासी जन-जीवन को उल्लासित करने का एक सर्वोत्तम माध्यम हैं। नृत्य, संगीत आदिवासी जीवन के… READ MORE
शेरसिंह सिंगोरिया: कोरोना बीमारी का खौफ़ चारों और फैला हुआ है, सारी दुनिया एक पिस्सु से वायरस के आगे बेबस… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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