शेरसिंह सिंगोरिया:

कोरोना बीमारी का खौफ़ चारों और फैला हुआ है, सारी दुनिया एक पिस्सु से वायरस के आगे बेबस और दंग सी रह गई है, और साथ में आई तरह-तरह की अफ़वाहों की आंधी।  इसके डर से ही कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। सोशल मीडिया पर खौफ़ और टीवी स्क्रीन पर वायरस का चित्र दर्शाया गया। इसका असर आदिवासी-ग्रामीण इलाकों में दिखने लगा, लोग तरह-तरह के टोटके-उपयोग करने लगे। महुआ के फूल के रस (दारू) को सैनिटाइज़र के रूप में उपयोग करने लगे, तो कहीं-कहीं जड़ी-बूटियों की धुनी (धुआं) देने लगे। बहुत जगह पर तो लोगों ने अपने-अपने गाँवों को भी सील कर दिया। 

बीमारी के डर के कारण कभी ग्रामीणों द्वारा तो कभी सरकार द्वारा पलायन करने वाले गरीब मज़दूरों के साथ घिनौनी हरकतें की गई। एक तरफ मज़दूर सैकड़ों कि.मी. धूप में, भूखे-प्यासे चलकर अपने-अपने गाँवों की ओर वापस बढ़े, तो दूसरी तरफ अमीर वर्ग के लोगों को घर लौटने के लिए ट्रेन और हवाई-जहाज़ की सुविधा दी गई। 

लॉकडाउन का शिक्षा पर असर:

माता-पिता के सपने पूरे करने शहर गए युवा साथी, हाथ में डिग्री लिए घर की ओर लौटे और देश में लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन खुलने का इंतज़ार करते-करते यह युवा साथी अपने समाज के रीती-रिवाज़ और संस्कृति को भी सीख गए। साथ में किसानी और मज़दूरी क्या होती है, वह भी काफी नज़दीकी से देखी और सीखी। लेकिन यह एक रूढ़िवादी शिक्षा भी थी। एक और स्कूल-कॉलेज बंद थे तो वहीं ग्रामीण इलाकों में कई जगह, सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान रखते हुए, घरों में ही निशुल्क शिक्षा दी जा रही थी तो प्राइवेट स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं। बच्चों को अब नया मोबाइल खरीदवाकर शिक्षा दी जा रही है। मां-बाप परेशान हैं कि दो-घंटे की ऑनलाइन क्लासेज और दिन भर मोबाइल (गेम) में बच्चे व्यस्त हैं और उच्च शिक्षा की भी हालत ख़राब है। सरकार द्वारा नई रिक्तियों के भरे जाने और निजीकरण में कोई कमी नहीं आ रही है। साथ ही ख़बरों में अब कोरोना की दूसरी लहर आने के संकेत दिए जा रहे हैं। 

घरेलू बजट पर असर:

लॉकडाउन का घरेलू किराना बजट पर बहुत बड़ा असर पड़ा है। मज़दूरी बंद होने से, वाहनों के आवागमन बंद होने के कारण किराना सामानों की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल आया और लोग चीजें संग्रहित करने में लग गए। वहीं किसानों की फसल का भाव ज़मीन पर ही रह गया, जिससे किसानों को काफी दिक्कतों और घटे का सौदा करना पड़ा। 

Author

  • शेरसिंह / Shersingh

    शेरसिंह, मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। जयस के ज़िला संयोजक, वे वहाँ के स्थानीय मुद्दों और छात्र मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

    View all posts

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading