उधार करके घी पियो!!

(संप्रभु बॉन्ड की हकीकत) डॉ राहुल बैनर्जी: सभी संप्रभु देशों की सरकारें, देश के विकास के लिए धन जुटाने के लिए, कर या शुल्क लगाती

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मैं अंधेरा बाँटता हूंँ

लाल प्रकाश राही:  मैं अंधेरा बाटता हूँ। सुबह से शाम, दोपहर से रात,हर समय हर जगह, जहाँ देखोगे जिधर देखोगे,मिलूँगा मैं, सिर्फ मैं। संसद से लेकर

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आखिर हम लोग ऐसे क्यों हैं?

कोरोना महामारी के समय भी कालाबाज़ारी! अमित: आजकल एक बात बहुत चल रही है सोशल मीडिया में कि हमारे देश के लोग ऐसे क्यों हैं

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सहअस्तित्व पर आधारित है गोंड समुदाय की ‘साझा’ व्यवस्था

अनुज बेसरा: आदिवासी समुदाय हमेशा से ही सहअस्तित्व पर विश्वास करते हुए और उसे जीते आए हैं। वह प्रकृति हो या प्राणिजगत, वह सबसे उतना

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पेट की भूख, रोटी का व्यास

लाल प्रकाश राही: पेट की भूख, रोटी का व्यास खींच ले गया उसे परदेश वह मज़दूर था, देश का भाग्य विधाता थोड़े था। कभी फुटपाथ

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