ज़ेबा वसी: अक्टूबर की हल्की ठंडी सुबह थी। जब मैंने दिल्ली से अयोध्या के लिए ट्रेन पकड़ी, तो मन में… READ MORE
श्रुतिका शाह : लहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?मैं पूछता हूँलहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?नब्ज़… READ MORE
आस्था राज: हमारी धरती नदियों के आंचल से ही सींची और संवरी है। भारत की नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं हैं,… READ MORE
गुफरान: अवध की धरती को लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब का पालना कहते हैं। यहाँ की रियासत का इतिहास सिर्फ़ नवाबी ठाठ-बाट… READ MORE
Arshia Kashyap : When the Uttar Pradesh government banned Periyar’s Sachchi Ramayana in 1969, it wasn’t just censoring a book—it… READ MORE
राकेश जाधव: लिखते-लिखते कोरे कागज ख़त्म हो गए थे, मैंने फ़टाफ़ट अपने ढीले कपड़े खूंटी पर लटकाए और झोला उठाकर… READ MORE
दीपा मेहरा : बचपन में दादाजी से जोशीमठ और औली की कहानियाँ सुनकर मन में एक अनोखा उल्लास और जिज्ञासा… READ MORE
गुफरान: भोजन वो चीज़ जिसे गरीब आदमी खाता है, नेता खाते हैं (पर मतलब कुछ और होता है), और संयुक्त… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
Designed with WordPress