कोर्दूला कुजूर: आषाढ़ महीना आते ही पानी बरसने पर किसान अपने खेतों को तैयार करने लगता है और बिचड़ा लगा… READ MORE
कोमल: अब गाँव वह गाँव नहीं रहा जो 30-40 साल पहले हुआ करता था। खेती में मौसम के बदलाव से… READ MORE
रोजालिया तिर्की: भारत कृषि प्रधान देश है। भारत के अंदर जितने भी राज्य हैं और राज्यों के अंदर छोटे-छोटे ज़िले… READ MORE
दिपक कांबळे आधुनिक पद्धतीला छेद देत युवा शेतकरी पारंपरिक पद्धतीने शेतीकडे वळताना दिसत आहे. ‘जुनं ते सोनं’ या म्हणीप्रमाणे आज… READ MORE
संजीव कुमार: सहरिया जनजाति, जो PVTG की सूची में शामिल है, यह देश की अत्यंत पिछड़ी जनजातियों में से एक… READ MORE
आस्था राज: हमारी धरती नदियों के आंचल से ही सींची और संवरी है। भारत की नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं हैं,… READ MORE
मनीषा शहारे : महुआ के पेड़ को आप सभी लोग जानते ही होंगे। यह ग्रामीण क्षेत्रों, जंगलों और खेतों में… READ MORE
बाबूलाल दाहिया: मित्रों! जब से ट्रंप अमरीका का राष्ट्रपति बना तबसे भारत के लिए कुछ न कुछ ऊल-जलूल बातें करता… READ MORE
संजीव: यह कहानी भोनपुरा पंचायत और उसमें बहने वाली शांत निर्मल नदी के आक्रामक अँधेरी दस्तक की है। ग्वालियर शहर… READ MORE
अफ़ाक : जंगल और पहाड़ हमको हमेशा अपनी ओर खींचते रहे हैं। बतौर पर्यटक हम बाहरी सुंदरता देखते-समझते हैं। दो-चार… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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