कोर्दूला कुजूर:
आषाढ़ महीना आते ही पानी बरसने पर किसान अपने खेतों को तैयार करने लगता है और बिचड़ा लगा देता है।
पानी बरसने पर रोपा का खेत तैयार हो जाता है, बिचड़ा भी तैयार हो जाता है और तब रोपा का काम शुरू होता है। कोशिश रहती है कि रोपा एक ही दिन में पूरा हो जाए। अतः इस काम के लिए गाँव भर की महिलाओं को बुलाया जाता है।
रोपा रोपते समय काम की एकरसता तोड़ने और मन को भुलावा देने के लिए महिलाएँ रोपा राग में गीत भी गाती जाती हैं। रोपा ही एक ऐसा विशेष काम है, जब आदिवासी महिलाएँ काम करते समय गीत गाती हैं।
यह राग सावन-भादो के महीनों में गाया जाता है।
नीचे कुछ रोपा लोक गीत इस प्रकार है –
1. ओ. – नेखै रोवा खल्ले नू, चन्दो रफेना कोड़े का मला ?
कि. – बबू भइयास ही, रोवा खल्ले नू, चन्दो रफेना कोड़े का मला -2
2. ओ. – नेखै बंडा मनेखा, चोतोर-चोतोर रे पटा चूगी ?
कि. – बबु भइयास ही बंडा मनेख़ा, चोतोर-चोतोर रे पटा चुगी।
3. ओ. – कोंको-लोको पेलो रोवा इदआ केरा,
बकुली लेक्खे लोयो-कोयो मनी ।
कि. – पैरी बारी पेलो रोवा इदआ केरा,
बकुली लेक्खे लोयो-कोयो मनी ।
4. ओ. -रोपे के तो रोपालों सिकी सारी धान,
एसों का बरिखा बड़ा दगा दियाय ।
कि० सावन भदो धुरी उड़ी गेला,
एसों का बरिखा बड़ा दगा दियाय ।
5. ओ. – सोनेसन बरेदा, रूपेसन हार, जोतू से हार मने चिते जोतै ।
कि. -लसलसा बिड़ा, दही लेखे कादो, रोपू से रोपोनी मने चिते रोपै ।
6. ओ. रसा रसारन चेंप पुंइयीं, हयरे भईया सिन चिन्ह’आ हूं पोल्लेन -2
कि. – पइरी बारी चेप पुइयिन, हेंराई भैयासिं चिन्ह’आ हूं पोल्लेन -2
अंगनई
जब रोपा के खेत में रोपा राग के गीत गाए जाते हैं, उसी मौसम में घर-आँगन में अंगनई नाच-गान भी होता है। अंगनई नाच सदानों के बीच अधिक प्रचलित है, लेकिन कहीं-कहीं आदिवासियों के बीच भी अंगनई नाच-गान होता है।
1. ओ . सरकारी खेत दइया, सराबना घास रे,
जने देखु तने बनिहार (हैंरै हाय) ।
कि. सोने केरा हार दइया, रूपे केरा जुवइठ रे,
जोते लगल मुसके जवान (हैंरै हाय) । 2 ।
2. ओ. बाघ भालू हार जोतें, सियार बुने धान रे,
बंदेरा तो लेझा बिछे जाय (हैंरै हाय) ।2।
कि. धान जे पकी गेल, सुगा काटे धान रे,
चुटिया मुसा बोहे धान (हैरै हाय) 12।
3. ओ. केऊ जे रोपै आँबा बगैचा रे,
केऊ जे रोपै रोपा बन, (ओहोइर गोई) ।2।
कि. बाबा जे रोपै आँबा बगैचा रे,
आयो जे रोपै रोपा बन (ओहोइर गोई) 121
कि. हरियारा दिसै आँगा बगैचा रे,
पियारा दिसै रोपा बन (ओहोइर गोई) 121
कि. रकपका करै आँबा बगैचा रे,
सनेसन करै रोपा बन (ओहोइर गोई) ।2।

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