विकास विरोधी रूढ़िवादी परंपराओं पर आदिवासी महिलाओं की कड़ी चोट

कोर्दुला कुजूर: कहा जाता है कि किसी भी समाज की भाषा-संस्कृति और वहाँ की परम्परा उस समाज का आईना होते हैं। हम मानते हैं और

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अयंग गही लोला चो | उठो मां तुम्हें बुला रही है

कोर्दुला कुजूर: (कुड़ुख कविता) अयंग गही लोला चोन्हा अयंग नमन मेख़ा लगी ब’आ लगी,चोआ हरो हे ओरमा आलारों निजड़ा नीम एवंदा ख़ंदरओर        एंदेर जिनिस बरचा

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