डॉ. सुरेश डुडवे, सहायक प्राध्यापक (हिन्दी), अरिहंत कॉलेज, बेंगलुरू, कर्नाटक :(संपादकीय समूह सदस्य, युवानिया)

युवानिया पत्रिका के 100 वें अंक के आगमन पर युवानिया संपादकीय समूह को हार्दिक बधाई। इस पत्रिका की निरंतरता बनाए रखने में जिन भी सदस्यों द्वारा लगातार कठिन परिश्रम किया जा रहा है, उन्हें विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूँ। मुझे याद है इस पत्रिका की शुरुआत आधारशिला शिक्षण केंद्र, साकड़ (मध्यप्रदेश) में अमित सर, जयश्री मैम के प्रयास से की गई, जहाँ मुझे भी पत्रिका के लिए कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ, उसके उपरांत कई साथियों ने इसे आगे बढ़ाने का कार्य किया। युवानिया का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपने समाज, भाषा, संस्कृति, साहित्य के प्रति जागरूक करते हुए उनकी बातों को लेखनी के माध्यम से मंच देना का प्रयास रहा है। जिसमें निश्चित ही सफलता मिल रही है।

मेरे लिए यह खुशी का पल है कि युवानिया पत्रिका मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाँव से प्रारंभ हुई और आज भारत के कई राज्यों के लोगों तक पहुंचकर उनकी आवाज, गीत, कहानियों, संघर्ष एवं जीवन की कथा को जगह देने का कार्य कर रही है। जो लोग सोचते थे हम कैसे लिख सकते? क्या लिख सकते है? हमारा लिखा हुआ कौन प्रकाशित करेगा? कौन पढ़ेगा? उन सभी के लिए यह पत्रिका सुअवसर प्रदान कर रही है। इसके माध्यम से भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों की संस्कृति, संघर्ष, जीवन के बारे में जानने–समझने को मिल रहा है।

पत्रिका के लेखक, लेखिकाओं को यही संदेश देना चाहता हूँ कि आप लगातार पढ़ते-लिखते रहे एवं अपने सृजनात्मक कार्य को निरंतर बनाए रखे। पाठकों से यही आशा रखता हूँ कि आप अधिक से अधिक पत्र-पत्रिकाओं  को पढ़ते रहे एवं स्वयं के सपनों, विचारों को पन्नों पर उतारने का प्रयास करें। आप भी युवानिया पत्रिका के लेखक-लेखिका बने।

मैं पुन: युवानिया पत्रिका के संपादक सदस्यों को बधाई देता हूँ, और आशा करता हूँ कि आप सभी इस पत्रिका को लगातार ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास करते रहें।

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कोर्दूला कुजूर; रांची, झारखंड :

युवानियां के सवां अंक आने पर, इस विकास और सफलता के लिए आप सभी को ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं। आप सभी के टीम वर्क ने सचमुच रंग लाया।

आप सभी कर्मयोगियों ने अपनी लगन, मेहनत और समर्पण भाव से उस मुकाम को हासिल किया है।श्रुति की मिशन के प्रति आप सबकी  मेहनत, लगन और प्रतिबद्धता अविश्वसनीय है।

कहा जाता है कि काम के प्रति अटूट लगन और एकाग्रता हमेशा रोमांचकारी होती है और आप सबने उसे बखुबी (निभाया) दर्शाया है।हम जानते हैं कि उपलब्धियों को स्वीकार करने से सभी का मनोबल, जुड़ाव और उत्पादकता बढ़ती है, आप सबने वो करके दिखाया है।

क्योंकि जब हम किसी काम की शुरुआत करते हैं तो फल की परवाह किए बिना आगे बढ़ते चले जाते हैं, क्योंकि किसी ने कहा है कि फल की परवाह किए बिना अपनी निरंतरता में बढ़ते चले जाओ, सफलता खुद ब खुद एक दिन आपके सामने आकर खड़ी हो जाएगी।

आज युवानियां का सवां अंक हमारे सामने आ चुका है और हमें बेहद खुशी है, कि हमने एक मुकाम को हासिल किया है।इस शानदार कारवां में शामिल होने का मौका मिला, और मैं भी इसका हिस्सा बनी, उसके लिए आभारी हूँ।

आप सभी के, कार्य के प्रति समर्पण और शानदार प्रदर्शन के द्वारा युवानियां का सवां अंक आज हमारे सामने प्रस्तुत है, आप सभी को फिर से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं ✊✊✊

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देवेंद्र; झालावाड़, राजस्थान :

प्रिय युवानिया, ज़िंदाबाद

तो तुम 100 अंक पुरानी हो गयी! देखते-देखते लगभग चार साल निकल गये। कितने ही युवा साथियों ने तुम्हें सराहा, सहेजा, तुम्हें सुन्दर बनाया। अपनी बातें, अपनी कहानी तुम्हारे माध्यम से हम सब के साथ साझा करी।

ये कोई कम समय नहीं है। किसी भी पत्रिका के लिए 100 अंक का उत्सव बहुत महत्वपूर्ण है। कह सकते हैं कि हमारी ‘युवानिया’ अब किशोर अवस्था छोड़, युवा हो गयी है और आने वाले कई वर्षों तक से यात्रा इसी प्रकार चलती रहेगी। पुराने साथी बने रहेंगे, नये साथी जुड़ते जायेंगे!

बहुत-बहुत बधाई तुम्हें और तुम्हें सहेजने-संवारने वाली टीम को भी बहुत-बहुत बधाई। सच में यह एक बड़ा काम हुआ है। लेखक लिखते रहेंगे और युवानिया चलती रहेगी … यही विश्वास है।

ढेरों शुभकामनाएं…!

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गुफरान; फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश :

बधाई संदेश – युवानियां को अपने 100 वें अंक के लिए ढेर सारी मुबारकबाद। यह देखना बहुत शानदार रहा कि पूरे देश से सामाजिक बदलाव से जुड़े ढेर सारे युवाओं ने अपने नजरिए को यहां लिखा और पढ़ा। यह एक सुखद सफर की तरह है जिसमें ढेर सारे लोग एक दूसरे से बतियाते हुए सफर में साथी हो जाते हैं। यह सफर यूंही चलता रहे और नए साथियों को जोड़ता रहे युवाओं में लिखने पढ़ने की रुचि भी बनती रहे।

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Amulya Nayak; Dhenkanal, Odisha : 

“It is a great pleasure and glory for all of us that Yuvaniya has reached at it’s 100th publication. Yuvaniya has created scope for new writers and poets from people’s organisations and social movements by providing them inspiration, space and encouragement. It has helped the activist-writers to explore, improvise and express their experience and thoughts in different forms of writing. Yuvaniya is an unique and innovative endeavor. We wish continuation and further improvisation of Yuvaniya. “

Authors

  • सुरेश, मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले से हैं। आधारशिला शिक्षण केंद्र के पूर्व छात्र रह चुके सुरेश अभी तमिल नाडू सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे हैं।

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  • कोर्दुला कुजूर आदिवासी एक्टिविस्ट हैं और रांची, झारखंड में रहती हैं। महिलाओं और बच्चों के सवालों पर वह लंबे समय तक काम करते आ रही है और झारखंडी आदिवासी वुमेन्स एसोशियन शुरुआत करने में प्रमुख भूमिका निभाई हैं। साथ ही झारखंडी आदिवासियों के भाषा आंदोलन के सहभागी बनकर कुड़ुख भाषा को बचाए रखने का महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आयी हैं।

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  • देवेंद्र/Devendra

    देवेंद्र, राजस्थान के झालावाड़ ज़िले के झिरी गाँव में रहते हैं। वह सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं, और अपने गाँव में हम किसान संगठन का संचालन करते हैं साथ ही एक वैकल्पिक स्कूल मंथन शिक्षण केंद्र भी चलाते हैं।

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  • गुफरान, फैज़ाबाद उत्तर प्रदेश से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़े हैं। वह अवध पीपुल्स फोरम के साथ जुड़कर युवाओं के साथ उनके हक़-अधिकारों, आकांक्षाओ, और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम करते हैं।

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  • श्रुति से जुड़े ओडिशा के अंगुल और ढेंकनाल ज़िले के संगठन आदिवासी चेतना संगठन को बनाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अमूल्य भाई, संगठन के साथ जुड़कर आदिवासी और अन्य वनाश्रित समुदायों के साथ हक़-अधिकारों और जल-जंगल-ज़मीन-वन संसाधनो के मुद्दों पर काम करते आए हैं। साथ ही अमूल्य भाई एक बहुत ही प्रतिभाशाली संगीतकार भी हैं। अमूल्य भाई अध्ययन, अनुवाद और प्रशिक्षण जैसी वैचारिक गतिविधियों में भी विशेष सक्रियता के साथ काम करते हैं।

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